Monthly Archives: March 2007

मुझे विदुर चाहिए

हे भीष्म! आप महान हैं, धर्मात्मा हैं, ज्ञानी हैं, वीर हैं पितृभक्त हैं, बुजुर्ग हैं, संत हैं, अखंड ब्रह्मचारी हैं अष्ट वसुओं में श्रेष्ठ हैं, उनके अवतार हैं देवी गंगा मैया के आप पुत्र हैं आपको कोई हरा नहीं सकता … Continue reading

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कैसे हो एकत्व की भावना का विकास?

पिछले कुछ दिनों से हिन्दी चिट्ठाकारी में सांप्रदायिकता पर बहस के बहाने कुछ साथियों के बीच अवांछित और अप्रिय भाषा में तकरार हुई है, जिससे चिट्ठाकारी से जुड़े सभी लोगों को दु:ख हुआ है। हम मुद्दों पर बहस करने के बजाय व्यक्तियों पर प्रहार करने लग … Continue reading

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