Monthly Archives: February 2007

श्री अरविन्द के विचार: प्रत्यक्ष अनुभूति से प्रेरित दर्शन

सत्य की प्रत्यक्ष और गहन अनुभूति से उत्पन्न होने के कारण श्री अरविन्द के विचार पाठकों को सतही बौद्धिकता से परे चेतना के दिव्य आध्यात्मिक लोक में ले जाते हैं। उनके विचार उपनिषद के सूत्रों की तरह सघन अर्थों से गुम्फित होते हैं। पिछले … Continue reading

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चुनाव कीजिए सर्वश्रेष्ठ हिन्दी चिट्ठे का

मेरे लिए यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि इंडीब्लॉगीज, 2006 की जूरी ने बेस्ट इंडिक ब्लॉग (हिन्दी) की श्रेणी में जिन आठ चिट्ठों का चयन किया है, उनमें रवि रतलामी जी, अनूप शुक्ला जी, सुनील दीपक जी और जीतेन्द्र चौधरी जैसे दिग्गज एवं अनुभवी चिट्ठाकारों … Continue reading

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नेताजी सुभाष : सत्य की अनवरत तलाश

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिन पर प्रकाशित मेरे लेख पर पाठकों की व्यापक प्रतिक्रियाएँ आई थीं। आपमें से कई पाठकों ने मुझसे नेताजी से जुड़े तथ्यों के बारे में विस्तार से लिखने का आग्रह किया था। लेकिन विषय अत्यंत संवेदनशील … Continue reading

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शमशेरियत और हिन्दी कविता

गत दिसम्बर माह में मुझे ‘कवियों के कवि’ शमशेर बहादुर सिंह की कविताओं और उनपर लिखे गए आलोचनात्मक निबंधों का अवगाहन करने का अवसर मिला था और उसी क्रम में मैंने खुद भी उन पर एक आलोचनात्मक निबंध  लिखा था। अपने चिट्ठाकार मित्र जयप्रकाश मानस जी के अनुरोध पर मैंने उसे … Continue reading

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