Monthly Archives: October 2006

व्यंग्य के प्रतिमान और परसाई

व्यंग्य संवेदनशील एवं सत्यनिष्ठ मन द्वारा विसंगतियों पर की गई प्रतिक्रिया है– एक ऐसी प्रतिक्रिया जिसमें ऊपर से कटुता और हास्य की झलक मिलती है, पर उसके मूल में करुणा और मित्रता का भाव विद्यमान होता है। हरिशंकर परसाई जी … Continue reading

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कबीर के राम

गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के बालकांड में भगवान शिव के मुख से कुछ ‘अनमोल’ वचन कहलवाए हैं। किंतु ये वचन इतने कटु और अशोभनीय हैं कि सहज विश्वास नहीं होता कि ये रामचरितमानस जैसे महान और पवित्र काव्य के ही … Continue reading

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मुहम्मद साहब का आखिरी संदेश

आप सभी को ईद मुबारक! ईद के पावन अवसर पर आज मैं हज़रत मुहम्मद द्वारा हिजरत के दसवें साल में अपने अंतिम हज के अवसर पर मक्का में दिए गए आखिरी संदेश के कुछ अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ। मुहम्मद … Continue reading

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भूख

भूख, नींद और सेक्स–ये तीन आदिम प्रवृत्तियाँ हैं। सभी जीवधारी इन्हीं तीन प्रवृत्तियों से नैसर्गिक रूप से संचालित होते हैं। मनुष्य को भी यही प्रवृत्तियाँ संचालित करती हैं। जब तक मनुष्य इन प्रवृत्तियों को नियंत्रित करने की कला नहीं सीख … Continue reading

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सेहत के लिए सिर्फ सोलह मिनट

क्या आप भी ऐसे व्यक्तित्व के स्वामी बनना चाहते हैं जो काफी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद हमेशा तरोताजा दिखता हो और अपनी उपस्थिति मात्र से चारों ओर स्फूर्ति और स्निग्धता के वातावरण का सृजन कर देता हो? लेकिन दिक्कत यह … Continue reading

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