Monthly Archives: August 2006

हिन्दी के दुश्मन

(आलोचक नामवर सिंह द्वारा चार वर्ष पूर्व हिन्दी दिवस के अवसर पर लिखित लेख के संपादित अंश)   आज हिन्दी की स्थिति त्रिशंकु की है। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान उसे राष्ट्रभाषा बनाने की मांग हुई और स्वाधीन भारत की वह … Continue reading

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एक थी फूलन

नियति जिंदगी में कैसे-कैसे रंग बिखर सकती है, इसे कोई नहीं जानता। फूलन भी नहीं जानती थी। पर नियति ने फूलन की जिंदगी के लिए बहुत से रंग सजाए थे। जन्म से लेकर मरण तक फूलन का पूरा जीवन सुर्ख, … Continue reading

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