स्कूल के दिनों में समूह प्रार्थना करते समय हमारे कुछ मुसलमान सहपाठी पंक्ति में शामिल तो होते थे, पर मौन रहते थे और उनके हाथों की मुद्रा भी विश्राम में रहती थी। यहां तक कि धर्मनिरपेक्ष शब्दावली वाली प्रार्थनाओं या राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के समय भी उनका अंदाज वही रहता था। एक बार टोका तो उनमें [...]
Posted in दर्शन, साहित्य, कला on November 15th, 2011 6 Comments »
‘मौन, शून्य और शांति’ सत्य के प्राय: सभी साधकों के लिए अभिव्यक्ति के न सिर्फ प्रस्थान-बिंदु, बल्कि चरम गंतव्य भी रहे हैं। यह और बात है कि अभिव्यक्ति के लिए वे भले ही अलग-अलग माध्यम चुनते हों। अक्षय अमेरिया हमारे दौर के एक ऐसे ही युवा चित्रकार हैं, जिनके चित्रों में मौन के महाशून्य से [...]
Posted in समीक्षा, साहित्य on June 6th, 2009 10 Comments »
जिंदगी की राह में मिले अच्छे-बुरे अनुभवों के खट्टे-मीठे रंगों के कोलाज हम सब के मन में बनते-मिटते रहते हैं, लेकिन जब हम किसी कहानी के पात्रों के प्रिज्म से होकर उन्हें देखते हैं तो उन कोलाजों में से उभरती कुछ नायाब शक्लें स्मृति-पटल पर टँग जाती हैं। अच्छी कहानियों को पढ़ते हुए जिंदगी के [...]
यह देखकर अच्छा लग रहा है कि हिन्दी साहित्य के शोधछात्र भी अब शोध के सिलसिले में इंटरनेट का रुख़ करने लगे हैं और गूगल सर्च एवं हिन्दी विकिपीडिया के लेखों में दिए गए संदर्भ लिंकों के माध्यम से हिन्दी चिट्ठों पर उपलब्ध सामग्रियों में से भी अपने उपयोग लायक सामग्री तलाश रहे हैं। इस [...]