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Archive for the 'संविधान और विधि' Category

स्कूल के दिनों में समूह प्रार्थना करते समय हमारे कुछ मुसलमान सहपाठी पंक्ति में शामिल तो होते थे, पर मौन रहते थे और उनके हाथों की मुद्रा भी विश्राम में रहती थी। यहां तक कि धर्मनिरपेक्ष शब्दावली वाली प्रार्थनाओं या राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के समय भी उनका अंदाज वही रहता था। एक बार टोका तो उनमें [...]

आशा है कि न्यासिता (ट्रस्टीशिप) के बारे में गांधीजी के सिद्धांतों और ओमप्रकाश कश्यप द्वारा उन सिद्धांतों में इंगित की गई ‘कमजोरियों’ से अब तक आप अवगत हो चुके हैं। दरअसल, कश्यप जी द्वारा की गई आलोचना को गांधीजी के ट्रस्टीशिप संबंधी सिद्धांतों की एक प्रतिनिधि आलोचना माना जा सकता है और अपने लेख में उन्होंने [...]

अब तक हम सब सुनते और मानते आए थे कि ‘साँच को आँच नहीं’। यानी, जो ईमानदार है उसे डरने की जरूरत नहीं। मगर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के लिए ऐसा नहीं है। हो सकता है कि इसके पीछे उनका अपना व्यक्तिगत अनुभव रहा हो। वह एक सच्चे और ईमानदार व्यक्ति के रूप में जाने जाते [...]

पिछली पोस्ट में हमने यह संकेत करने की कोशिश की कि आरटीआई आवेदकों के खिलाफ हिंसा और हत्या की वारदातों के पीछे भ्रष्टाचार में लिप्त सरकार से बाहर के व्यक्तियों के साथ-साथ खुद सरकारी विभागों की भी भूमिका होती है। हमने यह सवाल भी उठाया कि बाहरी व्यक्तियों को कैसे पता चल जाता है कि किस [...]

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