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Archive for the 'दर्शन' Category

‘मौन, शून्य और शांति’ सत्य के प्राय: सभी साधकों के लिए अभिव्यक्ति के न सिर्फ प्रस्थान-बिंदु, बल्कि चरम गंतव्य भी रहे हैं। यह और बात है कि अभिव्यक्ति के लिए वे भले ही अलग-अलग माध्यम चुनते हों। अक्षय अमेरिया  हमारे दौर के एक ऐसे ही युवा चित्रकार हैं, जिनके चित्रों में मौन के महाशून्य से [...]

आशा है कि न्यासिता (ट्रस्टीशिप) के बारे में गांधीजी के सिद्धांतों और ओमप्रकाश कश्यप द्वारा उन सिद्धांतों में इंगित की गई ‘कमजोरियों’ से अब तक आप अवगत हो चुके हैं। दरअसल, कश्यप जी द्वारा की गई आलोचना को गांधीजी के ट्रस्टीशिप संबंधी सिद्धांतों की एक प्रतिनिधि आलोचना माना जा सकता है और अपने लेख में उन्होंने [...]

 मीडिया, मध्य वर्ग और आम जनता से वह शिकायत अब दूर होने लगी है, जो मुझे लंबे अरसे से रही है और जिसे समय-समय पर मैं अभिव्यक्त करता भी रहा हूं। शायद हम सभी को उस एक निमित्त का इंतजार था, जिसके माध्यम से हमारे भीतर की प्रखर चेतना संघनित होकर अभिव्यक्त हो सके। शायद [...]

अपने एक मित्र से मिलने गया था। उनके कार्यालय की दीवार पर टँगे एक वाक्य पर नज़र गई। लिखा था: सपने वे नहीं होते जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वे होते हैं जो हमें सोने नहीं देते। उस वाक्य में निहित प्रेरणा देर तक मन में गूंजती रही। किंतु फिलहाल, मैं उन्हीं सपनों [...]

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