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Archive for the 'जन सरोकार' Category

स्कूल के दिनों में समूह प्रार्थना करते समय हमारे कुछ मुसलमान सहपाठी पंक्ति में शामिल तो होते थे, पर मौन रहते थे और उनके हाथों की मुद्रा भी विश्राम में रहती थी। यहां तक कि धर्मनिरपेक्ष शब्दावली वाली प्रार्थनाओं या राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के समय भी उनका अंदाज वही रहता था। एक बार टोका तो उनमें [...]

आशा है कि न्यासिता (ट्रस्टीशिप) के बारे में गांधीजी के सिद्धांतों और ओमप्रकाश कश्यप द्वारा उन सिद्धांतों में इंगित की गई ‘कमजोरियों’ से अब तक आप अवगत हो चुके हैं। दरअसल, कश्यप जी द्वारा की गई आलोचना को गांधीजी के ट्रस्टीशिप संबंधी सिद्धांतों की एक प्रतिनिधि आलोचना माना जा सकता है और अपने लेख में उन्होंने [...]

इस वर्ष अप्रैल में जंतर-मंतर पर हुए अन्ना के असरकारी अनशन के बाद मैंने आशंका जाहिर की थी कि आंदोलन की सफलता का श्रेय और लाइमलाइट लूटने की पुरानी होड़ और व्यक्तित्वों की आपसी टकराहट उसे राह से भटका न दे। वह आशंका सच साबित होने लगी है। और अब तो हालत यह हो चली [...]

ऊपर से आकर्षक दिखने के बावजूद ट्रस्टीशिप के सिद्धांत में अनेक कमजोरियां हैं. यह सम्राटों-सामंतों की दान-परंपरा का आधुनिक संस्करण है. चूंकि धर्म स्वयं सामंती परिवेश की देन है, इसलिए प्रायः सभी धर्मग्रंथों में किसी न किसी रूप में दान की महत्ता गायी गयी है. राजा-महाराजाओं के दरबारी-चाटुकार उनकी दानशीलता का तो बखान करते थे, [...]

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