स्कूल के दिनों में समूह प्रार्थना करते समय हमारे कुछ मुसलमान सहपाठी पंक्ति में शामिल तो होते थे, पर मौन रहते थे और उनके हाथों की मुद्रा भी विश्राम में रहती थी। यहां तक कि धर्मनिरपेक्ष शब्दावली वाली प्रार्थनाओं या राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के समय भी उनका अंदाज वही रहता था। एक बार टोका तो उनमें [...]
ऊपर से आकर्षक दिखने के बावजूद ट्रस्टीशिप के सिद्धांत में अनेक कमजोरियां हैं. यह सम्राटों-सामंतों की दान-परंपरा का आधुनिक संस्करण है. चूंकि धर्म स्वयं सामंती परिवेश की देन है, इसलिए प्रायः सभी धर्मग्रंथों में किसी न किसी रूप में दान की महत्ता गायी गयी है. राजा-महाराजाओं के दरबारी-चाटुकार उनकी दानशीलता का तो बखान करते थे, [...]
Posted in चिट्ठाकारिता, अन्यत्र on April 26th, 2007 35 Comments »
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में भारतीय राजनीतिक इतिहास के प्रमुख चरित्रों के नामों और उनसे संबंधित प्रसंगों का उल्लेख केवल कथ्य को स्पष्ट करने के प्रयोजन से किया गया है। उनका इस लेख की विषयवस्तु से किसी प्रकार का कोई अंतर्संबंध नहीं है। यहां की गई तुलनाओं को कृपया अन्यथा न लिया जाए। राजनीति सेवा की [...]
व्यस्तता की वजह से कुछ दिनों से मुझे कोई पोस्ट लिख सकने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया, इसलिए इस दौरान चिट्ठों को पढ़ते हुए जहाँ कहीं जरूरी लगा, मैंने त्वरित टिप्पणी के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देकर काम चलाने की कोशिश की। लेकिन ऐसा लगता है कि उन टिप्पणियों की प्रतिक्रिया में कुछ [...]