Category Archives: विश्लेषण

हिन्दी ब्लॉगिंग : पुराने संदर्भ और प्रासंगिक सरोकार

हिन्दी ब्लॉगिंग की विधा के बारे में ये कुछ सवाल लिखकर मनीषा पांडेय ने पांच साल पहले 4 जनवरी, 2008 को मुझे भेजे थे। उनके हुक्म के मुताबिक हमने इन सवालों के जवाब भी भेज दिए थे, पर शायद किन्हीं … Continue reading

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मनुष्य, रोबोट और क्लोन

इस ब्लॉग पर वर्तमान शृंखला लिखते समय मैं स्वत:स्फूर्त अंदाज में हूं। इस बार लिखते समय पहले की भाँति कोई तैयारी नहीं कर रहा। कोई संदर्भ नहीं देख रहा, कोई उद्धरण नहीं दे रहा। दरअसल मेरे सामने कोई विषय नहीं … Continue reading

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प्राण : शरीर को संचालित करने वाली ऊर्जा

आज मैं ‘प्राण’ की बात करने जा रहा हूँ। उस प्राण की नहीं, जो हिन्दी सिनेमा जगत के बेहतरीन कलाकारों में से एक रहे हैं और आज भी 92 साल की उम्र में हमारे बीच मौजूद हैं। हाँ, एक बात … Continue reading

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जो नैतिक है वही न्यासी हो सकता है

आशा है कि न्यासिता (ट्रस्टीशिप) के बारे में गांधीजी के सिद्धांतों और ओमप्रकाश कश्यप द्वारा उन सिद्धांतों में इंगित की गई ‘कमजोरियों’ से अब तक आप अवगत हो चुके हैं। दरअसल, कश्यप जी द्वारा की गई आलोचना को गांधीजी के ट्रस्टीशिप … Continue reading

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टीम अन्ना को हुए मर्ज़ की आख़िर दवा क्या है?

इस वर्ष अप्रैल में जंतर-मंतर पर हुए अन्ना के असरकारी अनशन के बाद मैंने आशंका जाहिर की थी कि आंदोलन की सफलता का श्रेय और लाइमलाइट लूटने की पुरानी होड़ और व्यक्तित्वों की आपसी टकराहट उसे राह से भटका न … Continue reading

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