Category Archives: प्रेरक विचार

जो नैतिक है वही न्यासी हो सकता है

आशा है कि न्यासिता (ट्रस्टीशिप) के बारे में गांधीजी के सिद्धांतों और ओमप्रकाश कश्यप द्वारा उन सिद्धांतों में इंगित की गई ‘कमजोरियों’ से अब तक आप अवगत हो चुके हैं। दरअसल, कश्यप जी द्वारा की गई आलोचना को गांधीजी के ट्रस्टीशिप … Continue reading

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गांधीजी के ट्रस्टीशिप संबंधी सिद्धांत के कमजोर पक्ष

ऊपर से आकर्षक दिखने के बावजूद ट्रस्टीशिप के सिद्धांत में अनेक कमजोरियां हैं. यह सम्राटों-सामंतों की दान-परंपरा का आधुनिक संस्करण है. चूंकि धर्म स्वयं सामंती परिवेश की देन है, इसलिए प्रायः सभी धर्मग्रंथों में किसी न किसी रूप में दान … Continue reading

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कई और अन्ना चाहिए अभी…

 मीडिया, मध्य वर्ग और आम जनता से वह शिकायत अब दूर होने लगी है, जो मुझे लंबे अरसे से रही है और जिसे समय-समय पर मैं अभिव्यक्त करता भी रहा हूं। शायद हम सभी को उस एक निमित्त का इंतजार … Continue reading

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कमीने और ईमानदार

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अनास्था जहाँ आस्था में बदल जाती है

एक हिन्दुस्तानी की डायरी पर दो सप्ताह पहले अतिथि चिट्ठाकार के रूप में शुरुआत करते हुए Design Flute ने “राम बोलने से क्या बन जाएगा” शीर्षक से धर्म और आस्था के सवाल पर एक बहस छेड़ी थी और साथ ही … Continue reading

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