Category Archives: प्रेरक विचार

अत्यंत करीब है वह महापरिवर्तन, जिसका केन्द्र भारत बनेगा

युगों-युगों से मानव की समष्टि संवेदना जिस धर्म-चक्र से संचालित होती रही है, उस धर्म-चक्र की स्वाभाविक गति भी धरती पर देश, काल और परिस्थिति-जन्य प्रतिरोध से प्रभावित होती है। इसलिए उस गति को नियमित और निर्बाध बनाए रखने के … Continue reading

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जो नैतिक है वही न्यासी हो सकता है

आशा है कि न्यासिता (ट्रस्टीशिप) के बारे में गांधीजी के सिद्धांतों और ओमप्रकाश कश्यप द्वारा उन सिद्धांतों में इंगित की गई ‘कमजोरियों’ से अब तक आप अवगत हो चुके हैं। दरअसल, कश्यप जी द्वारा की गई आलोचना को गांधीजी के ट्रस्टीशिप … Continue reading

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