Category Archives: प्रशासनिक सुधार

केवल गैर-जिम्मेदार और भ्रष्ट नौकरशाह ही घबराते हैं आरटीआई से

अब तक हम सब सुनते और मानते आए थे कि ‘साँच को आँच नहीं’। यानी, जो ईमानदार है उसे डरने की जरूरत नहीं। मगर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के लिए ऐसा नहीं है। हो सकता है कि इसके पीछे उनका अपना … Continue reading

Posted in प्रशासनिक सुधार, भ्रष्टाचार, समसामयिक, संविधान और विधि, सूचना का अधिकार, जन सरोकार, विश्लेषण | 2 Comments

आरटीआई आवेदक की पहचान तीसरे पक्ष को उजागर न हो

पिछली पोस्ट में हमने यह संकेत करने की कोशिश की कि आरटीआई आवेदकों के खिलाफ हिंसा और हत्या की वारदातों के पीछे भ्रष्टाचार में लिप्त सरकार से बाहर के व्यक्तियों के साथ-साथ खुद सरकारी विभागों की भी भूमिका होती है। हमने … Continue reading

Posted in प्रशासनिक सुधार, भ्रष्टाचार, समसामयिक, संविधान और विधि, सूचना का अधिकार, जन सरोकार, विश्लेषण | Leave a comment

बेमानी है यह ‘सुरक्षा’ सूचना हेतु शहीद होने वालों के लिए

सूचना हासिल करने की ‘हिमाकत’ करना दिनों-दिन अधिक खतरनाक बनता जा रहा है। ऐसे माहौल में कम-से-कम दर्जन भर आरटीआई कार्यकर्ताओं की शहादत के बाद संवेदनशील बने केन्द्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने यह तय किया है कि अब से किसी … Continue reading

Posted in प्रशासनिक सुधार, भ्रष्टाचार, समसामयिक, संविधान और विधि, सूचना का अधिकार, जन सरोकार, विश्लेषण | 1 Comment

कई और अन्ना चाहिए अभी…

 मीडिया, मध्य वर्ग और आम जनता से वह शिकायत अब दूर होने लगी है, जो मुझे लंबे अरसे से रही है और जिसे समय-समय पर मैं अभिव्यक्त करता भी रहा हूं। शायद हम सभी को उस एक निमित्त का इंतजार … Continue reading

Posted in चुनाव सुधार, दर्शन, पत्रकारिता, प्रशासनिक सुधार, प्रेरक विचार, भ्रष्टाचार, राजनीति, समसामयिक, संविधान और विधि, जन सरोकार, विश्लेषण, अन्ना हजारे | Tagged , , , , , | Leave a comment

कैसे बदलेगा नौकरशाही का चरित्र

सर्वविदित है कि भारत में नौकरशाही का मौजूदा स्वरूप ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की देन है। देश की पराधीनता के दौरान इस नौकरशाही का मुख्य मकसद भारत में ब्रिटिश हुकूमत को अक्षुण्ण रखना और उसे मजबूत करना था। जनता के हित, … Continue reading

Posted in प्रशासनिक सुधार | 3 Comments