Category Archives: निजी डायरी

मनुष्य, रोबोट और क्लोन

इस ब्लॉग पर वर्तमान शृंखला लिखते समय मैं स्वत:स्फूर्त अंदाज में हूं। इस बार लिखते समय पहले की भाँति कोई तैयारी नहीं कर रहा। कोई संदर्भ नहीं देख रहा, कोई उद्धरण नहीं दे रहा। दरअसल मेरे सामने कोई विषय नहीं … Continue reading

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प्राण : शरीर को संचालित करने वाली ऊर्जा

आज मैं ‘प्राण’ की बात करने जा रहा हूँ। उस प्राण की नहीं, जो हिन्दी सिनेमा जगत के बेहतरीन कलाकारों में से एक रहे हैं और आज भी 92 साल की उम्र में हमारे बीच मौजूद हैं। हाँ, एक बात … Continue reading

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मध्यान्तर के बाद

मैं जिस शरीर में हूं, उसने संभवत: अपनी आधी आयु पार कर ली है। जो शरीर मुझे प्रारब्ध से माँ-बाप के माध्यम से मिला है, उसकी जितनी बेहतर देखभाल मुझे करनी चाहिए थी, वैसी मैं नहीं कर पाया हूँ। एक … Continue reading

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कुछ तो अलग जरूर था जंतर-मंतर पर

आज जंतर-मंतर पर जो देखा, वह कुछ अलग तो जरूर था। हालांकि लोग उसी तरह दर्जनों बसों में भर कर लाए गए थे, मगर भीड़ वह नहीं थी, जो राजनीतिक दलों की महारैलियों में जुटाई जाती है, जिसकी बदौलत दिल्ली … Continue reading

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भरी दोपहर में आधे घंटे की सैर

टहलने जैसी बुनियादी आदत का छूट जाना कभी-कभी बिल्कुल अस्वाभाविक-सा लगता है। किंतु जब अपनी सेहत पर इसके दूरगामी असर को महसूस करता हूं तो बेहद अफसोस होता है। अपने फिटनेस को कायम नहीं रख पाना और ब्लड प्रेशर, हाइपो … Continue reading

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