Category Archives: दर्शन

मनुष्य, रोबोट और क्लोन

इस ब्लॉग पर वर्तमान शृंखला लिखते समय मैं स्वत:स्फूर्त अंदाज में हूं। इस बार लिखते समय पहले की भाँति कोई तैयारी नहीं कर रहा। कोई संदर्भ नहीं देख रहा, कोई उद्धरण नहीं दे रहा। दरअसल मेरे सामने कोई विषय नहीं … Continue reading

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प्राण : शरीर को संचालित करने वाली ऊर्जा

आज मैं ‘प्राण’ की बात करने जा रहा हूँ। उस प्राण की नहीं, जो हिन्दी सिनेमा जगत के बेहतरीन कलाकारों में से एक रहे हैं और आज भी 92 साल की उम्र में हमारे बीच मौजूद हैं। हाँ, एक बात … Continue reading

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मध्यान्तर के बाद

मैं जिस शरीर में हूं, उसने संभवत: अपनी आधी आयु पार कर ली है। जो शरीर मुझे प्रारब्ध से माँ-बाप के माध्यम से मिला है, उसकी जितनी बेहतर देखभाल मुझे करनी चाहिए थी, वैसी मैं नहीं कर पाया हूँ। एक … Continue reading

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गहन मौन के बहुआयामी चित्र

‘मौन, शून्य और शांति’ सत्य के प्राय: सभी साधकों के लिए अभिव्यक्ति के न सिर्फ प्रस्थान-बिंदु, बल्कि चरम गंतव्य भी रहे हैं। यह और बात है कि अभिव्यक्ति के लिए वे भले ही अलग-अलग माध्यम चुनते हों। अक्षय अमेरिया  हमारे … Continue reading

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जो नैतिक है वही न्यासी हो सकता है

आशा है कि न्यासिता (ट्रस्टीशिप) के बारे में गांधीजी के सिद्धांतों और ओमप्रकाश कश्यप द्वारा उन सिद्धांतों में इंगित की गई ‘कमजोरियों’ से अब तक आप अवगत हो चुके हैं। दरअसल, कश्यप जी द्वारा की गई आलोचना को गांधीजी के ट्रस्टीशिप … Continue reading

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