नेताजी सुभाष : सत्य की अनवरत तलाश

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिन पर प्रकाशित मेरे लेख पर पाठकों की व्यापक प्रतिक्रियाएँ आई थीं। आपमें से कई पाठकों ने मुझसे नेताजी से जुड़े तथ्यों के बारे में विस्तार से लिखने का आग्रह किया था। लेकिन विषय अत्यंत संवेदनशील होने के कारण मैं कुछ नए प्रमाणों के उपलब्ध होने का इंतजार कर रहा था, जिसे सूचना के अधिकार के तहत हासिल किए जाने के प्रयास चल रहे थे। हालाँकि इन प्रयासों में अभी तक कोई विशेष महत्वपूर्ण सफलता हासिल नहीं हुई है, फिर भी आशा है कि केन्द्रीय सूचना आयोग के सख्त आदेश के बाद अगले माह होने वाली सुनवाई के दौरान सरकार कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों को उजागर करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने को बाध्य होगी।

नेताजी के कथित रूप से लापता हो जाने से संबंधित अधिकांश आधिकारिक दस्तावेजों को सरकार ने अब तक अति गोपनीय श्रेणी में रखा है। यहाँ तक कि कोलकाता उच्च न्यायालय के आदेश पर उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मनोज मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित जाँच आयोग को भी सरकार ने बारंबार अनुरोध किए जाने के बावजूद इस मामले से संबंधित कई दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए और जाँच में अपेक्षित सहयोग भी नहीं दिया। मुखर्जी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सरकार के इस रवैये के बारे में विस्तार से लिखा है। इसके बावजूद मुखर्जी आयोग ने अपने काम को बखूबी अंजाम दिया और जाँच के पाँच प्रमुख बिन्दुओं पर 8 नवम्बर, 2005 को पेश अपनी रिपोर्ट में निम्नानुसार ठोस निष्कर्ष दिए:

 

(क) क्या सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु हो चुकी है या वे जीवित हैं?

मुखर्जी आयोग - नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु हो गई है।

(ख) यदि उनकी मृत्यु हो चुकी है तो क्या उनकी मृत्यु जैसा कि कहा गया है हवाई दुर्घटना में हुई थी?

मुखर्जी आयोग - उनकी मृत्यु वायुयान दुर्घटना में नहीं हुई, जैसा कि बताया जाता है।

(ग) क्या जापानी मंदिर में जो अस्थियाँ रखी हैं वे नेताजी की अस्थियाँ हैं?

मुखर्जी आयोग -जापानी मन्दिर में रखे अवशेष नेताजी के नहीं हैं।

(घ) क्या उनकी मृत्यु किसी अन्य स्थान पर किसी अन्य ढंग से हुई है और यदि हाँ तो कब और कैसे?

मुखर्जी आयोग -किसी निश्चित साक्ष्य के अभाव में कोई सकारात्मक उत्तर नहीं दिया जा सकता।

(ङ) यदि वे जीवित हैं तो उनके पते-ठिकाने के संबंध में…

मुखर्जी आयोग – उत्तर (क) में पहले ही दिया जा चुका है।

लेकिन भारत सरकार संसद में प्रस्तुत अपनी कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) में मुखर्जी आयोग के इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हुई कि नेताजी की मौत 18 अगस्त, 1945 को कथित वायुयान दुर्घटना में नहीं हुई थी और जापान के रेन्कोजी मंदिर में रखी अस्थियाँ नेताजी की नहीं हैं। संसद में इस बारे में हुए वाद-विवाद के दौरान गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने सरकार की तरफ से यह सफाई दी कि इस मामले पर पूर्ववर्ती शाह नवाज खान जाँच समिति तथा जी. डी. खोसला आयोग के निष्कर्षों को सरकार अधिक विश्वसनीय मानती है।

जबकि इसके ठीक विपरीत 28 अगस्त, 1978 को लोक सभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उन दो पूर्ववर्ती जाँचों के निष्कर्षों के संबंध में निम्न वक्तव्य दिया था:

18 अगस्त 1945 को मंचूरिया की हवाई यात्रा के दौरान तैहोकु हवाई अड्डे पर हवाई दुर्घटना में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु की रिपोर्ट के बारे में दो बार जांच की गई है जिनमें से एक मेजर जनरल शाह नवाज खां की अध्यक्षता में एक समिति द्वारा की गई थी और दूसरी पंजाब उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री जी.डी. खोसला की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जाँच समिति द्वारा की गई थी। पहली समिति ने बहुमत से और श्री खोसला ने उनकी मृत्यु संबंधी रिपोर्ट को सच माना था। उसके बाद से इन दो रिपोर्टों में पहुंचे निष्कर्षों की सच्चाई को लेकर उचित शंकाएँ प्रस्तुत की गई हैं तथा साक्षियों की गवाही में अनेक महत्वपूर्ण असंगतियाँ देखी गई हैं, कुछेक अन्य और अधिक समकालीन सरकारी दस्तावेजी रिकार्ड भी उपलब्ध हो गए हैं। इन शंकाओं और असंगतियों तथा रिकार्डों के प्रकाश में सरकार यह स्वीकार करने में दिक्कत महसूस करती है कि पिछले निर्णय असंदिग्ध थे। 

तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उपर्युक्त वक्तव्य देते समय जिन समकालीन आधिकारिक दस्तावेजी अभिलेखों का संदर्भ लिया था, उन दस्तावेजों के बारे में मुखर्जी आयोग द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और मंत्रिमंडल सचिवालय (रॉ) से बारंबार पूछे जाने पर यही जवाब मिला कि उनके पास इस तरह के कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। मुखर्जी आयोग ने सरकार के इस रवैये के बारे में निम्न शब्दों में टिप्पणी की:

2.5.7 अत: भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों/ कार्यालयों ने जो रुख अपनाया उससे यह देखा जा सकता है कि उनके पास इस तरह के कोई समकालीन सरकारी दस्तावेजी रिकार्ड उपलब्ध नहीं थे जिनके आधार पर स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई ने उपर्युक्त वक्तव्य दिया था जबकि आयोग अपने आपको यह समझाने और विश्वास करने में अत्यंत कठिनाई महसूस करता है कि देश का एक प्रधानमंत्री संसद के सदन में इस तरह का एक गलत वक्तव्य दे सकता है और उनके द्वारा उल्लिखित समकालीन सरकारी रिकार्डों के उपलब्ध न होने की स्थिति में अधिकार हनन का जोखिम आमंत्रित कर सकता है। अब जैसा कि भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों/ कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दृढ़तापूर्वक उन रिकार्डों की अनुपलब्धता की बात कही गई है – इस स्थिति ने निश्चय ही जाँच की कार्रवाई में एक रोक लगा दी है।

नेताजी की मौत की परिस्थितियों की जाँच से संबंधित अभी तक के अनुभव से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी जब तक सत्ता में रहेगी तब तक इस मामले की सच्चाई जनता के सामने नहीं आ पाएगी। कोई गैर-कांग्रेसी सरकार ही मामले की सच्चाई के उजागर होने में निमित्त बन सकती है। खोसला आयोग की रिपोर्ट के जिन निष्कर्षों को 1978 में जनता पार्टी की सरकार ने खारिज कर दिया था, उसे कांग्रेस के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार अब विश्वसनीय मान रही है। इसी तरह, वर्ष 1999 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा गठित जस्टिस मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्षों से कांग्रेस के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार ने असहमति जता दी है।

इस संबंध में 2 फरवरी, 2007 को कोलकाता उच्च न्यायालय ने मुखर्जी आयोग के मुख्य निष्कर्षों को खारिज करने वाली केन्द्र सरकार की कार्रवाई रिपोर्ट को रद्द किए जाने की मांग करते हुए दायर एक जनहित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इस याचिका में जापान के रेन्कोजी मंदिर में रखी अस्थियों को भारत लाए जाने की अनुमति नहीं दिए जाने की प्रार्थना भी की गई है। गौरतलब है कि कोलकाता उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिए गए आदेश पर ही भारत सरकार ने मुखर्जी आयोग का गठन किया था।

सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत इस मामले से संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों की प्रतियाँ हासिल करने की कोशिशों में जुटे दिल्ली की एक गैर-सरकारी संस्था मिशन नेताजी के अनुज धर के अनुभव कुल मिलाकर बहुत उत्साहवर्धक नहीं रहे हैं। हाल ही में 19 जनवरी, 2007 को देश की बाह्य खुफिया एजेंसी रॉ ने अनुज धर को भेजे उत्तर में अपने पास नेताजी से संबंधित किसी गोपनीय दस्तावेज का अस्तित्व होने से इन्कार कर दिया है। लेकिन जैसा कि वर्ष 2001 में मुखर्जी आयोग के समक्ष तत्कालीन गृह सचिव कमल पाण्डे द्वारा दायर शपत्र पत्र के साथ संलग्न अति गोपनीय दस्तावेजों की सूची से पता चलता है कि रॉ के पास इस तरह के कुछ दस्तावेज अवश्य रहे हैं।

(क्रमश:)

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51 Responses to नेताजी सुभाष : सत्य की अनवरत तलाश

  1. jp shukla says:

    Neta ji ki maut ki sachhai kahi kisi ki kamjoriyon aur satta ki bhook ke peeche ka kala sach bhi chupa sakti hongi jis-se bharat ka aur itihaas se jude kisi khas ka daman na daagdaar ho , jinhe ho sakta hai aaj hum poojte hai sachhai pata chale ke baad kahi unhi par thukna na shuru kar de isiliye dabaya ja raha hai, varna aaj hume ye pata hota ki vo sachha bharat premi , jisne bharat aur humare liye alag hi sapne dekhe the wo kaun si maut mare .

  2. asit guin says:

    Japan sold Netaji and Netaji-dummy to British;
    In WW-I, Japan was an ally of British. Before WW-II, Japan-US trade war and political war started, this led to actual war between US and Japan. So British became an enemy to Japan by diplomatic manipulation as US – British alliance was there. After WW-II, Japan revived their old connection with British via spies. Japanese and British spies were enough linked before WW-II. Japanese spies agreed to eliminate Netaji. Motive was to appease the British and purchase security for Japan royal family. Thus, Japan sold Netaji to British and British eliminated him. The false news of air crash was Japan’s fabrication. In any controversial case, liar is to be suspected first.
    Netaji’s plan to start second independence war with the help of USSR was known to Japan. There was enough scope for British and Japanese spies to develop a common minimum program against pro-communist agenda of Netaji. Why should Japanese imperialism agree to patronize emergence of independent India as a permanent communist ally? Is it not more logical to fulfill British condition and purchase favor? Why Japan royal family was not tried as a war criminal? What is the mystery behind this favor?
    There is another point about gumnami baba. Who was he? Gumnami baba was a dummy created as a part of common minimum program of Japanese imperialism and British imperialism. In axis camp, creation of dummy by plastic surgery was a common practice. Hitler and Mussolini were having number of dummies. Japan sold Netaji-dummy to British. British deputed this dummy at faizabad of Uttar Pradesh, with a purpose to create confusion that as if Netaji’s death or life is doubtful. The confusion prevented the nation to be doubtful about role of Japan or British. So gumnami baba of faizabad is a common creation of Japanese spies and British spies. Never had he told the truth. If he had told anything, that must be lie. In a controversial case, liar is to be suspected. So, Japan sold Netaji to British and British executed him in secret. Japan sold Netaji-dummy to British and British deputed him at faizabad of Uttar-Pradesh. Japan surrendered to US-UK side on 15th august 1945. Netaji’s last flight was on 18th august 1945. A surrendered Japan was no longer an ally of azad hind. They worked as per their new mentors, the British.

  3. balram yadav says:

    satya jo bhi hai , samne ana chahiye.

  4. Vandematram, me aapke sath hun….09983809898, jaipur, rajsthan.

  5. Sukhendra says:

    लेख पढ़ा बहुत सी जानकारी मिली अगले का इंतजार है

  6. asit guin says:

    British Indian archival documents show that during the dying months of World War II, Viceroy Wavell and senior British officials did not want Netaji Subhash Chandra Bose brought to India even as a prisoner. The surviving documents reflect British preference for dealing with the leader ‘on the spot’ – whatever that meant. On the other hand, Bose was focused on stimulating a post-war internal Indian upsurge against the British Raj. Subhash was convinced that India’s partition was inevitable if the British Parliament were allowed to “transfer power” under an act of the British Parliament. (Gandhiji in 1946-47 had the same fear. He wanted the British to leave India and allow Indians themselves to find a solution to the Muslim League’s demand for partition along religious lines). Bose’s aim in 1945 was not just to escape the British pursuit. He had foreknowledge of Japan’s decision to capitulate. In the spring of 1945, he had wanted personally to lead a military challenge against the superior forces of the Allies. He wanted to court death in this battle. Suicide was not the aim of this move. He thought that, after Aung San of Burma switched over to the victorious British side at the last moment, the INA needed to set an example of patriotic bravery in battle. He felt his own death in battlefield would stimulate a new phase in India’s internal freedom struggle. He was dissuaded from this course because two divisions of the INA were still intact and he thought of a new role for this patriotic Indian military force in the postwar situation. Unlike other leaders of the Japan-occupied Southeast Asian countries, he, at one stage, thought of staying with INA troops in Singapore to await the arrival of the Mountbatten-led British Indian occupation force. This course was abandoned on August 14, 1945, on the advice of the members of the Azad Hind government and other important officers of the INA. On Aug 14, 1945, some information was brought to him from Thailand. This information led him to abandon the plan that the INA troops with Netaji as their head, should await the capture of Singapore by the British occupation force. There is no record of the information that caused the Azad Hind government to ask Netaji to fly to Tokyo for final consultations with the Japanese government. Is it likely that Netaji had been forewarned of the British preference for dealing with him “on the spot”? Netaji had not rejected the idea of his being taken to India as a prisoner. Did he fear that he would not be taken to India as a British prisoner? He knew of the existence of the Allies’ spies and operatives in the INA and the Anglo-American forces and agents operating behind the Japanese lines. As the war drew to a close, important but vulnerable people changed sides. They acted on the Allies’ directives.
    The INA, too, had been penetrated by persons who were Allies’ operatives. Even in Japan there were important people who wanted to please the victors. They were ready to pay the price the new masters demanded of them. Netaji Subhash Chandra Bose knew that he was in a veritable snake pit. It is necessary to bear this fact in mind when the story of his death in an air crash on August 18, 1945 is read. The British Foreign Office had ordered the assassination of Netaji Subhash Chandra Bose in 1941, just after he had made his “grand escape” from Kolkata. But his decision to change route and reach Germany via Russia had scuttled their plan. Eunan O’Halpin of Trinity College, Dublin, made this claim while delivering the Sisir Kumar Bose lecture at the Netaji Research Bureau on Sunday. O’Halpin said the British Special Operation Executive (SOE) (formed in 1940 to carry out sabotage and underground activities) informed its representatives in Istanbul and Cairo that Bose was thought to be travelling from Afghanistan to Germany via Iran, Iraq and Turkey. The orders had come from London. “They were asked to wire about the arrangements made for his assassination. Even in the midst of war, this was a remarkable instruction. Bose had definitely planned a rebellion to free India, but the usual punishment for this was prosecution or detention, not an assassination. He was to die because he had a large following in India,” said O’Halpin. He added that it was strange that the British did not consider any alternative. If British agents could get close enough to kill him, they surely could have attempted to capture him. The fact that any trace of London’s orders to assassinate Bose remains in official records is just as striking. O’Halpin handed over relevant documents to Krishna Bose, former MP and wife of late Sisir Bose. The British Foreign Office did not learn about Bose’s arrival in Germany in April for two months. Towards the end of May, the London office was told by Delhi that Bose could still be in Afghanistan because there was no radio propaganda from Russia, Italy or Germany as they had expected. This was despite the fact that a message had been decoded in March confirming Bose’s departure from Kabul. On June 13, 1941, the British SOE confirmed to Istanbul that the assassination order still stood. After Japan surrendered to British- American, again scope came for British to utilize a surrendered Japan against Netaji. So, British must have utilized this new opportunity and assassinated Netaji in secret. Thus Netaji assassination is common program of Japan and British. Defeated and surrendered japans had not worked as azad hind ally. On the contrary they worked as per order of their new mentors, the British. AZAD HIND FAUZ had fought for right purpose but in the wrong side.

  7. हमारे देश में एसा कोई नहीं हैं की हमारे देश की शेर को ढूंढ़ कर ला सके और देश को अपना संतान बापस दे सके, भारत माँ भी अपनी संतान के लिए रो रही हैं उन्हें ढूंढ़ के लाना हमारा कर्तब्य हैं, अगर उनकी कोई भी प्रमाण न
    ला सके तो अभी भी अंग्रेजो की जीत माना जाएगी! जो भारत माँ की अपमान हैं ! जवाब जो कुछ भी हो वो जनता के पास आना चाहिए, आशा हैं की सरकार भी चिंतित हैं और इस बारे में जल्दी ही पर्दा उठाएंगे हमारे सरकार , जय हिन्द ………………………

  8. R B YADAV says:

    नेताजी अध्यात्मिक युग पुरुष हैं जो कुछ उनको करना था, किया और अब वे कुछ समय के लिए अंतर्ध्यान हुए हैं, मगर काम अभी भी बहुत बाकी है . अब वे अध्यात्मिक शक्तियों से काम लेंगे और देश को सही मायेने में आजाद कराएँगे. हम लोंगों को थोडा विवेक से काम लेना चाहिए और उन पर विस्वाश करना चाहिए . ऐसी शक्तियां कभी भी अधुरा काम नहीं छोडती हैं. वे पुनः आयेंगे और काम करके जायेंगे. जयहिंद..

  9. asit guin says:

    Japan sold Netaji and netaji dummy to british;
    In WW-I, Japan was an ally of British. Before WW-II, Japan-US trade war and political war started, this led to actual war between US and Japan. So British became an enemy to Japan by diplomatic manipulation as US – British alliance was there. After WW-II, Japan revived their old connection with British via spies. Japanese and British spies were enough linked before WW-II. Japanese spies agreed to eliminate Netaji. Motive was to appease the British and purchase security for Japan royal family. Thus, Japan sold Netaji to British and British eliminated him. The false news of air crash was Japan’s fabrication. In any controversial case, liar is to be suspected first.
    Netaji’s plan to start second independence war with the help of USSR was known to Japan. There was enough scope for British and Japanese spies to develop a common minimum program against pro-communist agenda of Netaji. Why should Japanese imperialism agree to patronize emergence of independent India as a permanent communist ally? Is it not more logical to fulfill British condition and purchase favor? Why Japan royal family was not tried as a war criminal? What is the mystery behind this favor?
    There is another point about gumnami baba. Who was he? Gumnami baba was a dummy created as a part of common minimum program of Japanese imperialism and British imperialism. In axis camp, creation of dummy by plastic surgery was a common practice. Hitler and Mussolini were having number of dummies. Japan sold Netaji-dummy to British. British deputed this dummy at faizabad of Uttar Pradesh, with a purpose to create confusion that as if Netaji’s death or life is doubtful. The confusion prevented the nation to be doubtful about role of Japan or British. So gumnami baba of faizabad is a common creation of Japanese spies and British spies. Never had he told the truth. If he had told anything, that must be lie. In a controversial case, liar is to be suspected. So, Japan sold Netaji to British and British executed him in secret. Japan sold Netaji-dummy to British and British deputed him at faizabad of Uttar-Pradesh. Japan surrendered to US-UK side on 15th august 1945. Netaji’s last flight was on 18th august 1945. A surrendered Japan was no longer an ally of azad hind. They worked as per their new mentors, the British.

  10. asit guin says:

    The diary of the World War Two Prime Minister of Imperial Japan, General Hideki Tojo, was made public by his wife, as per his wishes, many years after he was hanged in 1948 for war crimes. There were reports in some Japanese newspapers that in his diary, General Tojo had written that India was to be conquered by Japan with the assistance of Subhash Chandra Bose and the Indian National Army, and after that was accomplished, Bose was to be exterminated by the Japanese. This item of news did not speak well for Bose, and was therefore suppressed by the Government of India as well as the Indian media. The sum of it all was that Bose joined the wrong forces, and had to pay dearly for his folly. The British gave India independence in 1947. Had India been a colony of Germany or Japan, God only knows if and when it would have ever got its freedom.

  11. asit guin says:

    Japan agreed to eliminate Netaji;
    In WW-I, Japan was an ally of British. Before WW-II, Japan-US trade war and political war started, this led to actual war between US and Japan. So British became an enemy to Japan by diplomatic manipulation as US – British alliance was there. After WW-II, Japan revived their old connection with British via spies. Japanese and British spies were enough linked before WW-II. Japanese spies agreed to eliminate Netaji. Motive was to appease the British and purchase security for Japan royal family. Thus, Japan sold Netaji to British and British eliminated him. The false news of air crash was Japan’s fabrication. In any controversial case, liar is to be suspected first.
    Netaji’s plan to start second independence war with the help of USSR was known to Japan. There was enough scope for British and Japanese spies to develop a common minimum program against pro-communist agenda of Netaji. Why should Japanese imperialism agree to patronize emergence of independent India as a permanent communist ally? Is it not more logical to fulfill British condition and purchase favor? Why Japan royal family was not tried as a war criminal? What is the mystery behind this favor? Japan agreed to eliminate Netaji;
    In WW-I, Japan was an ally of British. Before WW-II, Japan-US trade war and political war started, this led to actual war between US and Japan. So British became an enemy to Japan by diplomatic manipulation as US – British alliance was there. After WW-II, Japan revived their old connection with British via spies. Japanese and British spies were enough linked before WW-II. Japanese spies agreed to eliminate Netaji. Motive was to appease the British and purchase security for Japan royal family. Thus, Japan sold Netaji to British and British eliminated him. The false news of air crash was Japan’s fabrication. In any controversial case, liar is to be suspected first.
    Netaji’s plan to start second independence war with the help of USSR was known to Japan. There was enough scope for British and Japanese spies to develop a common minimum program against pro-communist agenda of Netaji. Why should Japanese imperialism agree to patronize emergence of independent India as a permanent communist ally? Is it not more logical to fulfill British condition and purchase favor? Why Japan royal family was not tried as a war criminal? What is the mystery behind this favor?

  12. Monojit says:

    makhi ke roti nimbu ka achar chand ke chandni khushio ka bahar neta je apko mera kute kute pranam

  13. bharat das says:

    आखिर कब तक सरकार जनता से नेताजी की सच्चाई छुपाएगी ?
    क्या सरकार को अब भी नेताजी की सच्चाई से डर लग रहा है या फिर उन्हें लग रहा है कि कहीं उनकी कुर्सी न छीन जाय.
    पहले उन्हें नेताजी जी से डर लगता था और अब उनके इतिहास से.
    स्वतंत्रता क्रांति में शहीद होने वालों में नेताजी जी का स्थान सर्वोपरि है.
    सारा देश जनता है कि नेताजी, भगत सिंह जैसे देशभक्तों और क्रांतिवीरों के बिना आजादी का सपना एक सपना ही रह जाता क्योंकि गांधीजी अपने नाम के लिए और जवाहर लाल नेहरु कुर्सी के लिए लड़ रहे थे.
    नेताजी १०, १०० या १००० के नोटों पर नहीं हमारे दिल में बसते थे, बसते हैं और बसते रहेंगे.

    WE SALUTE TO THE GREAT LEADER AND A FORGOTTEN HERO NETAJI SUBHASH CHANDRA BOSE.

  14. amit,haridwar says:

    thats a very good effort,i listen some talks about netaji’s son is it true,if yes why the government not taking decision about DNA test of netaji’s bones which is in the japanies tample.

    thanks
    amit

  15. sanjay joshi says:

    NETAJI KE BARE ME BAHUT SUNDAR PADHNE KO MILA, HUM YE CHAHATE HAI KI SWATANTRAVIR SAVARKARJI KE BARE ME BHI LIKHE. DHANYVAD.

  16. amit maheshwari says:

    DEAR ALL INDIANS……SARVAPRATHAM.NETAJI,KO,,,,,,,,,,,,,,NAMAN……….AAP.SABHI…..KA.DHYAN…MAIN…….KBC.KE…….AID….KI.TARAF.AKARSHIT.KARANA.CHATA.HUIN..JISME……..TUM MUJHE KHUN DOMAIN TUMHE AZADI DUNGA KE UNKE US SARVAMANYA.NARE.KA.MAZAK…UDAYA.GAYA……….HAI…..APP.SABHI…SE.MERI.YE.PRATHANA.HAI.KI………..AAP…….ME.SE.KOI….MERI……..ES AWAZ KO BHARAT SARKAR TAK PAHUCHAYE AND ES AID PAR TURANT ROK LAGAYI JANI CHAIYE.AMIT.MAHESHWARI08@REDIFFMAIL.COM.09319876581

  17. yogesh gupta says:

    kya netaji 1950 mein mao (china) ke saath thy aur tibbat mein dalai lama ke bad mao ke administretor adviser rahe?
    ek web site per ye maine dekha hai .what are you think about it.

  18. amit says:

    srijan jee apne jis kam ka beeda uthaya he usme har sacha hindustani apke sath he

  19. JAI HIND,NEJAI NETAJI BOSE ! JAI HIND ! LONG LIVE THE REVOLUTION !

  20. yadavendra says:

    thank you|
    secret will be secret.Because Indian is in mesurity, not Bhartiya.

  21. Aj tak des ye samaj nahi paya ke congress Govt.& Bjp Govt. Neta ji Subash babu ke dath ke mamle me Janta ko such ku nahi batate sorry brother& sister Uncle & aunty & friends muje to is me Subash babu ke against me jo neta/leader jo un ke kam se Khus nahi ta une ke chal lagte hai ke

    JAI HIND

  22. BALBEER says:

    YOU ARE THE BEST.WE PROUD OF YOU.AAP NAI PIDHI ME FARISTA BANKAR JARUR VAPIS AAOGE.AAP HAMARE DILON ME HAMESHA RAJ KAROGE.

    JAI HIND,NETAJI SUBHASH CHANDRA BOSE KI JAI

  23. BALBEER says:

    YOU ARE THE BEST.WE PROUD OF YOU.BHALE HI AAP AEROPLANE ACCIDENT ME MAR GAYE HO YE AAJ TAK KISI KO PATA NAHI CHAL PAYA HE. AGAR AAP MAR BHI GAYE HO TAB BHI AAP HAMARE DILON ME HAMESA JIVIT RAHOGE.
    JAI HIND

  24. prasan says:

    RUTHLESS INVADERS IRRESPECTIVE FROM DIFFERENT PARTS OF THE GLOBE HAVE COME AND GONE.

    HOW STRONG OUR CULTURE IS THAT EVEN TODAY WE ARE STILL THE SAME, WHAT WE WERE YESTERDAY ! WITH VERY LITTLE OF VARIATION OF SEEING AND BELIEVING IN THINGS.

    WAKE UP MY COUNTRY MEN. WE NEED NETAJI-SUBASH BOSE IDEALOGY TO PREVAIL AND THAT CAN HAPPEN ONLY WHEN WE ALL CAN UNITE AND JOIN HANDS IRRESPECTIVE OF CASTE, CREED AND COLOR.

    WE NEED ONE INDIA-ONE CULTURE WITH MANY FAITHS TO LIVE IN.

    TO CONCLUDE WE ARE STILL IN RUTHLESS HANDS OF OUR OWN PEOPLE. POLITICS AND BUREAUCRACY.

    JAI NETAJI BOSE ! JAI HIND ! LONG LIVE THE REVOLUTION !

  25. arvind kumar says:

    is bare m bharat swabhiman k rastriya mantri bhai rajiv dixit se vichar kiya jave

  26. Om Verma says:

    Neta Ji, Aap Hindustan ke dil pe raj kartey hai or kartey rahege. Bharat ki azadi me aap
    ki bhumika ek SHER ki thai Jisne angrejo ko
    dara or hila diya tha.
    AAPKO MERA SALUTE BHARAT MATA KI JAI

  27. bobby says:

    woh Samay jaroor ayega jab sach itihaas me darj hoga aur makkar sattadheeshon ko itihas ke kudedan me fenk diya jayega.

  28. sameer09673598336 says:

    if possibal pls tell me on cell phone.

  29. sameer09673598336 says:

    i want infermation about the monk life of netaji?
    where he get sanyasa?
    where he leaved?
    ect.
    basicaly i am writing book in marathi on netaji and ramkrushnamath and mission,and swami vivekananda.
    can any one help me.
    pls help me.

  30. Indian says:

    Its all politics shit. he not die as India government (Congress) shows. He disappear and India gets freedom that means its sure that some deal for freedom. and to save his reputation in blind Indians they secret all this. and memory of Indian are also not effective they forgot everything that why gandhi through him from his party he wins that time more that 200 votes. but so what Hume gulami ki adat pad chuki hai 800 saal musalmano ne phir 200 saal angrejo ne aur ab 60 saal se congress ki. Koi bata sakta hai ki angrejo ke raat me jawahar lal s/o motilal kaha se aye and how they have so much money. and what is the history of motilal nehru from where he was. all shit was a preplanned mein jyada kuch nahi kahonga kyoinki jo ye sab jante hai vo chup hai. like atal vihari bajpai. he know every thing but …..

  31. satwinder says:

    I am also conssious to know that Netaji live or died. If died then when, where and how. In which circumstancess and why janta janarden never know about the actuall facts of netaji’s death. why we are speechless when our childeren ask about the death of netaji.

    • asit guin says:

      Japan sold Netaji and Netaji-dummy to British;
      In WW-I, Japan was an ally of British. Before WW-II, Japan-US trade war and political war started, this led to actual war between US and Japan. So British became an enemy to Japan by diplomatic manipulation as US – British alliance was there. After WW-II, Japan revived their old connection with British via spies. Japanese and British spies were enough linked before WW-II. Japanese spies agreed to eliminate Netaji. Motive was to appease the British and purchase security for Japan royal family. Thus, Japan sold Netaji to British and British eliminated him. The false news of air crash was Japan’s fabrication. In any controversial case, liar is to be suspected first.
      Netaji’s plan to start second independence war with the help of USSR was known to Japan. There was enough scope for British and Japanese spies to develop a common minimum program against pro-communist agenda of Netaji. Why should Japanese imperialism agree to patronize emergence of independent India as a permanent communist ally? Is it not more logical to fulfill British condition and purchase favor? Why Japan royal family was not tried as a war criminal? What is the mystery behind this favor?
      There is another point about gumnami baba. Who was he? Gumnami baba was a dummy created as a part of common minimum program of Japanese imperialism and British imperialism. In axis camp, creation of dummy by plastic surgery was a common practice. Hitler and Mussolini were having number of dummies. Japan sold Netaji-dummy to British. British deputed this dummy at faizabad of Uttar Pradesh, with a purpose to create confusion that as if Netaji’s death or life is doubtful. The confusion prevented the nation to be doubtful about role of Japan or British. So gumnami baba of faizabad is a common creation of Japanese spies and British spies. Never had he told the truth. If he had told anything, that must be lie. In a controversial case, liar is to be suspected. So, Japan sold Netaji to British and British executed him in secret. Japan sold Netaji-dummy to British and British deputed him at faizabad of Uttar-Pradesh. Japan surrendered to US-UK side on 15th august 1945. Netaji’s last flight was on 18th august 1945. A surrendered Japan was no longer an ally of azad hind. They worked as per their new mentors, the British.

  32. Saroj Sinha says:

    Netaji live or dead?

  33. Anuj Dhar says:

    Dear Srijanji

    Kudos to you for lucidly introducing such a complicated subject. The generations before us had been greatly confused by myriad stories and myths related to this case. Now we have much clarity, thanks to the newly available information.

    I also take this opportunity to make some small comment on what Neerajji has written:

    It is true that Govt has the right to accept or reject any report. But when the matter at hand concerns the fate of a national hero, the rejection should not be arbitrary. You will find it interesting to note that, legally speaking, the Govt continued to hold as late as February 2005 that they did not believe in the Taipei crash theory. What led to this turnaround is a mystery.

    Regards

  34. धन्यवाद सृजन जी, आपने एक बार फिर अच्छा व संतुलित लेख लिखा है ।
    आपने जो गाँधी जी के विषय में वार्ता आरम्भ की थी उसपर टिप्पणी अपने स्वास्थ्य के कारण टाइप न कर सकी। पर लिखा बहुत कुछ था। ऐसे ही लिखते रहिए ।

  35. खोजपरक अध्ययन पर आधारित शानदार लेख। अगली कड़ियों का इंतजार रहेगा।

  36. नेता जी की मृत्‍यु के संदर्भ में जितनी तरह की बातें फैली हुई हैं, वे सभी आज भ्रामक की श्रेणी में पहुंच गये हैं। अख़बारों में वक्‍त वक्‍त पर नयी बातें आती रहती हैं। अलग अलग आयोग अपनी रिपोर्ट पेश कर चुके हैं। इन सबके बीच आपका अनुसंधान (जो अभी जारी है) ज़ोखिम की हद तक नया है। आपकी इस प्रतिभा का उपयोग कई तरह के विषयों में होना चाहिए। हमारी शुभकामनाएं।

  37. SHUAIB says:

    आपने अच्छा सिलसिला शुरू किया है और अगली कडीयों का भी इन्तेज़ार रहेगा। इतने बडे नेता की मृत्यु कैसे हुई जनता को पता तक नहीं?
    आपका बहुत धन्यवाद कि सिर्फ इसी लेख से बहुत सी जानकारीयां मिलीं और अगले लेख का बेचैनी से इनतेज़ार है।

  38. आलोक पुतुल says:

    अच्छा विश्लेषण।

  39. रवि says:

    सरकार इन दस्तावेज़ो को अतिगोपनीय मानकर छुपा रही है तो अवश्य ही उनमें कुछ ऐसे मसाले होंगे जिनसे राजनीतिक दलों को परेशानियाँ हो सकतीं होंगी, परंतु बीच में जनता सरकार थी और बाद में बीजेपी की तो इन्होंने तो कांग्रेस को नीचा दिखाने को कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी, तब भी तो ये जानकारियाँ बाहर आ सकती थीं?

    यह तो तय है – लोग नेता जी की मृत्यु के नाम पर नाहक हल्ला नहीं करते रहे थे.

  40. Tarun says:

    इतना शोधपूर्ण लेख के लिये साधुवाद, नेताजी की मृत्यु का तो वाकई अनसुलझा रहस्य है। देखें कब गुत्थी सुलझती है, सुलझती भी है कि नही।

  41. बहुत ही शोधपूर्ण और तथ्यपरक लेख। आशा है अगली कड़ी में और भी जानकारी मिलेगी।

  42. लेख पढ़ा! आगे का इंतजार है!

  43. लेख पढ़कर ही महसूस हो रहा है कि नेताजी की मृत्यु का रहस्य हर आयोग के बाद और भी ज़्यादा गहरा जाता है. राजनीतिक दल राष्ट्र सपूत की शहादत पर रोटियां सेकने से बाज़ नहीं आते. आपने अत्यंत परिश्रम से तथ्यपरक लेख लिखा है. बधाई स्वीकारें.
    मैं यह भी सोच रहा हूं कि सत्तारूढ़ सरकार की कौन-सी मजबूरियां है जो मुखर्जी आयोग की मांग पर इच्छित दस्तावेज मुहैया नहीं कर सकी. किंतु यह भी सत्य है कि आयोग की सिफ़ारिशें या जांच आज्ञापक नहीं होतीं. ये सरकारों का विवेक है कि उसे स्वीकारें या अस्वीकारें. इस बिंदु पर भविष्य में किस तरह की क़ानूनी कसरत की जा सकती है.. अगले लेख में प्रकाश डालें.

  44. पंकज बेंगाणी says:

    सृजनजी,

    आपकी मेहनत तारीफ के लायक. कई जानकारीयाँ मिली हैं जो पता नही थी. आपको साधुवाद.

    लेकिन सोचने कि बात यह है कि आखिर ऐसा क्या है जो सरकार छुपा रही है. सोचने कि बात यह भी है कि सरकार बदलने पर भी जानकारी बाहर क्यो नहीं आती. कांग्रेस कुछ छुपाए बात समझ आती है, बीजेपी भी?

  45. अनामदास says:

    मेहनत सराहनीय है और सामग्री पठनीय. ब्लॉग पर तुकबंदी और मन के गुबार निकालने वाले विचार-वमन से उकताए पाठकों को ताज़गी मिलेगी. जारी रखिए.
    अनामदास

  46. आज तक देश यह समझ नहीं पाया कि सरकार नेताजी के देहांत के मामले में जनता को सत्य क्यों नहीं बताती।
    अगली कडियों का इंतजार बेसब्री से है।

  47. नेताजी की मृत्यु से जुड़ी जानकारियों का उम्दा विश्लेषण, परंतु मृत्यु का रहस्य, रहस्य ही रहा। अगले भाग का इंतजार है, शायद कुछ रोशनी मिल सके।

    वैसे सृजन शिल्पी जी आपने बहुत ही उम्दा विश्लेषण किया है, बहुत कम लोग जानते होंगे कि किस जाँच रिपोर्ट में कौन-से तथ्य सामने आये थे? और किस पर क्या-क्या सवाल उठे थे?, आपने उनको यह जानकारी भी राष्ट्र-भाषा में उपलब्ध करवा दी है।

    अगली कड़ी जल्द ही प्रस्तुत कीजियेगा।

  48. संजय बेंगाणी says:

    यह तय लग रहा है कि, नेताजी की मृत्यु वैसे नहीं हुई जैसे बताया जाता रहा है.
    देखना है सरकार कब तक सच्चाई को छुपा कर रख सकती है.

    अच्छी लेख श्रृंखला, अगली कड़ी का इंतजार है.

    • asit guin says:

      Here is an old news on Netaji , which proves that Japan had played some foul game with Netaji for their own imperialist interest.
      Japanese had altered Netaji’s flight plan.
      Mr Debnath das , formerly general secretary of India independence league, in south east Asia told the Khosla commission, that Netaji Subhash Chandra Bose, had mentioned to him on the night of Aug 16, 17 1945, that the Japanese had changed their plan regarding his departure from Saigon at the eleventh hour. Appearing as a witness before the commission, inquiring the disappearance of Netaji Bose, Mr Dass quoted Netaji as telling him and some Indian national army officers, who were present at the time, that japans wanted to take him to Tokyo instead of Manchuria. He and some important INA officers present at Saigon did not like the idea and asked Japanese officers where Netaji Bose was being taken. The Japanese replied “do not worry. You will be taken to the same place, where he is going. “They however, refused to reveal the name of the place, me das added. Me dass was the last witness to give evidence before mr justice g d Khosla on the commission‘s sitting in Delhi. Mr Das replied to the negative to a question by Mr Khosla, whether Netaji had expressed his dislike to the idea of going to a place, where the Japanese wanted to take him, but said, “It appeared to me as though Netaji was not happy at the change of destination. Mr das said Netaji had carried 18 metal boxes containing treasures belonging to the provisional govt of Azad Hind.

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