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‘मौन, शून्य और शांति’ सत्य के प्राय: सभी साधकों के लिए अभिव्यक्ति के न सिर्फ प्रस्थान-बिंदु, बल्कि चरम गंतव्य भी रहे हैं। यह और बात है कि अभिव्यक्ति के लिए वे भले ही अलग-अलग माध्यम चुनते हों।

अक्षय अमेरिया  हमारे दौर के एक ऐसे ही युवा चित्रकार हैं, जिनके चित्रों में मौन के महाशून्य से निकले शांति के स्वर गूंजते हैं। जैसा कि हर सच्चा कलाकार होता है, अक्षय के चित्र उनके भीतर के स्वप्न-द्रष्टा की झलक दिखाते हैं।

1963 में इंदौर में जन्मे और उज्जैन में रहने वाले अक्षय अमेरिया ने एम. एस. विश्वविद्यालय, बड़ौदा से चित्रकला में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है और वह अचल एलायस अवार्ड, अभ्युदय सम्मान, मीरा कला सम्मान, विष्णु चिंचालकर कला सृजन सम्मान आदि जैसे कई सम्मानों से अलंकृत हो चुके हैं।

मैंने पहले गौर नहीं किया था, पर अब ध्यान में आया है कि इस ब्लॉग पर भी उनका यदा-कदा आना-जाना रहा है। यहां तक कि उनके भेजे कई चित्र मेरे ई-मेल के इनबॉक्स में भी पाए गए हैं, जो असावधानी के चलते मेरी निगाहों से अब तक ओझल ही थे।

कहते हैं कि एक चित्र हजार शब्दों के बराबर अभिव्यक्ति करने में सक्षम होता है। मगर जब वह चित्र मौन को अभिव्यक्त करे तो …? उसके बराबर अभिव्यक्ति की क्षमता कितने शब्दों में होगी? अपनी कुछ पोस्टों में मैंने मौन को समझने और अभिव्यक्त करने के प्रयास किए हैं। लेकिन यदि आप अक्षय के इन चित्रों को देखें तो पता चलेगा कि शब्दों के बनिस्पत चित्र उसे कितने बेहतर अभिव्यक्त कर सकते हैं:

 

 

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6 टिप्पणियाँ to “गहन मौन के बहुआयामी चित्र”

  1. on 15 Nov 2011 at 11:47 AM संतोष त्रिवेदी

    चित्र शब्दों से बेहतर कहते हैं और ज्यादा कहते हैं.

    इस चित्रकार से मिलवाने का आभार !

  2. on 15 Nov 2011 at 12:11 PM Asheesh Dube

    आध्यात्मिक बिंबों का प्रयोग करते हुए चित्रों में मौन के अंतर्वलयों को उकेरा गया है…

    चितेरे को बधाई !

  3. on 15 Nov 2011 at 2:55 PM Prataap

    बहुत अच्छे चित्र, निश्चित ही इनका वर्णन मौन से ही हो सकता है ।
    बहुत अच्छी प्रस्तुति, आभार !

  4. on 15 Nov 2011 at 5:15 PM Srijan Shilpi

    @ संतोष त्रिवेदी, आशीष दुबे, प्रताप,

    आशा है कि अक्षय जी तक आप सभी की प्रतिक्रियाएं पहुंच चुकी होंगी।

    धन्यवाद !

  5. on 16 Nov 2011 at 3:27 PM Prataap

    लोकतंत्र के चौथे खम्बे पर अपने विचारों से अवगत कराएँ ।

    औचित्यहीन होती मीडिया और दिशाहीन होती पत्रकारिता

  6. on 16 Nov 2011 at 4:44 PM Srijan Shilpi

    @ Prataap,

    आप जैसे ब्लॉगर-टिप्पणीकर्ताओं के लिए ही मैंने एक प्लग-इन जोड़ा है, जो आपको यह सुविधा देता है कि टिप्पणी करते समय आपके ब्लॉग की आखिरी पोस्ट यहां स्वत: दिखाई दे और मेरे लिए भी आपकी नवीनतम रचना से परिचित होना सुगम हो जाएगा।

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