सेहत के लिए सिर्फ सोलह मिनट

क्या आप भी ऐसे व्यक्तित्व के स्वामी बनना चाहते हैं जो काफी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद हमेशा तरोताजा दिखता हो और अपनी उपस्थिति मात्र से चारों ओर स्फूर्ति और स्निग्धता के वातावरण का सृजन कर देता हो? लेकिन दिक्कत यह है कि हममें से अधिकांश व्यक्ति इस नेक और स्वाभाविक इच्छा को पूरा करने के लिए कोई बड़ी जहमत मोल लेना नहीं चाहते। मेरे जैसे कई चिट्ठाकार भी इसी श्रेणी में आते हैं जो व्यर्थ की सूचनाओं और अशांत करने वाले मनोरंजन के लिए घंटों कंप्यूटर या टेलीविज़न से चिपके रहते हैं, लेकिन अपनी सेहत के लिए कुछ वक्त नियमित रूप से निकालकर योगासन और व्यायाम आदि का अभ्यास जारी रखने के मामले में आलस्य बरतते हैं। आधुनिक विश्व में सूचना और मनोरंजन क्रांति के इन आविष्कारों के मानव सभ्यता पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में प्रसिद्ध विचारक एल्डस हक्सले ने सही टिप्पणी की थी:

The most alarming dangers are those which menace it (civilization) from within, that threaten the mind rather than the body and estate of contemporary man.

Countless audiences soak passively in the tepid bath of nonsense. No mental effort is demanded of them, no participation; they need only sit and keep their eyes open.

बाबा रामदेवहालाँकि बाबा रामदेव ने संचार क्रांति के माध्यमों का इष्टतम इस्तेमाल करते हुए लोगों को योग, प्राणायाम और आयुर्वेद की तरफ उन्मुख करने का चतुर्दिक अभियान कई वर्षों से छेड़ रखा है और अब तो उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में तमाम राष्ट्राध्यक्षों के माध्यम से विश्व भर में योग की पैठ स्थापित करने का अवसर मिल रहा है। फिर भी, हममें से बहुत-से व्यक्ति अब भी व्यस्तता का बहाना करते हुए अपनी सेहत के प्रति लापरवाही जारी रखे हुए हैं।

लोगों की इसी मनोवृत्ति को पहचानते हुए डॉ. (श्रीमती) विनोद वर्मा ने अपने व्यापक अनुभवों के आधार पर आयुर्वेद एवं योगविद्या के निचोड़ को आम जीवन में व्यावहारिक रूप से उतारने की सरल तरकीबें अपनी किताब, कार्यक्षमता के लिए आयुर्वेद और योग में प्रस्तुत की हैं। मूल रूप से जर्मन में लिखी गई इस पुस्तक का यह हिन्दी रूपांतर इसके अंग्रेजी अनुवाद सिक्सटीन मिनट्स टु ए बेटर नाईन टु फाइव पर आधारित है। यह आयुर्वेद और योग के मर्म की संक्षिप्त सैद्धांतिक और दार्शनिक विवेचना करने के साथ ही साथ उसके अभ्यास के लिए रोजाना मात्र सोलह मिनटों का एक नियमित कार्यक्रम प्रस्तुत करती है जिसका अनुपालन करने पर कुछ ही दिनों में आप पाएंगे कि आपकी कार्यक्षमता में काफी हद तक गुणात्मक परिवर्तन आ चुका है और आप अपने अंदर एक अपूर्व शांति, संतुष्टि और सहजता महसूस कर रहे हैं।

पुस्तक का उद्देश्य, लेखिका के ही शब्दों में, आपके बुनियादी स्वभाव के अनुसार बेहतर कार्य-वातावरण बनाने के लिए व्यक्तित्वों की समझ पर आधारित मार्गदर्शन सुलभ करवाना है। इसके लिए पुस्तक व्यक्ति-विशेष की मूल प्रकृति की पहचान और उसके अनुरूप बाह्य परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाने के लिए जीवन और स्वास्थ्य को समग्रता में देखे जाने की जरूरत को विशेष रूप से प्रतिपादित करती है। आज के दौर में यह पुस्तक की अत्यंत महत्वपूर्ण विशेषता ही कही जाएगी कि यह योग और आयुर्वेद की पद्धतियों को अपनाने के लिए रोजमर्रा के जीवन-क्रम में किसी प्रकार के कठिन फेरबदल की मांग किए बिना स्वास्थ्य के प्रति मूल नजरिए को बदलकर दैनिक चर्या में मात्र 16 मिनट की सरल प्रक्रियाओं के द्वारा कार्यकुशलता और स्वास्थ्य में गुणात्मक वृद्धि का सुगम विकल्प प्रस्तुत करती है। ये प्रक्रियाएँ आयुर्वेद के इस बुनियादी सिद्धांत पर आधारित हैं कि स्वास्थ्य दरअसल वात, पित्त और कफ रूपी शारीरिक त्रिदोषों तथा सत्व, रजस और तमस के मानसिक त्रिगुणों के बीच सतत पारस्परिक संतुलन का नाम है। रोजाना सोलह मिनट के इस कार्यक्रम में प्राणायाम, सूर्य नमस्कार और मानसिक नियंत्रण की संक्षिप्त प्रक्रियाएँ शामिल हैं। इसके अलावा शरीर, मन और आसपास के माहौल की सफाई के साथ-साथ कार्य-स्थल तथा घर पर कार्य करने के तौर-तरीकों में मामूली-से कुछ ऐसे सुधार किए जाने संबंधी परामर्शों का पालन भी इसके अंतर्गत आता हैं, जिनके लिए अलग से समय निकालने की जरूरत नहीं है।

यह पुस्तक उन व्यक्तियों को तो पढ़नी ही चाहिए जो दिन भर दफ्तर में बैठकर मानसिक प्रकृति का काम करते हैं और शारीरिक मेहनत तथा व्यायाम आदि के लिए समय नहीं निकाल पाते। विशेषकर ऐसे व्यक्तियों को, जो अपने कार्यस्थल को तनाव भरा पाते हैं और काम से घर लौटने के बाद अपने को थका-थका महसूस करते हैं और निढाल होकर बिस्तर पर सीधे पसर जाना चाहते हैं, जिनकी दिनचर्या विभिन्न कारणों से अनियमित और अस्तव्यस्त है और जिसके कारण वे अपने अंदर कभी स्फूर्ति और हल्कापन महसूस नहीं कर पाते। वैसे, इस पुस्तक में मसालों से बनी एक खास किस्म की काली चाय का एक नुस्खा भी दिया हुआ है जिसे अगर आप दफ्तर से आने के बाद पीएं तो आपकी थकान छूमंतर हो जाएगी। इतना ही नहीं, अगर आप किसी पारिवारिक या व्यक्तिगत कारण से दु:खी व परेशान हैं और उससे उबर नहीं पा रहे हैं तो पुस्तक इस मन:स्थिति से निकालकर पुन: स्वस्थ और सहज जीवन की ओर लौटाने में काफी हद तक सहायक हो सकती है।

लेकिन पुस्तक का दायरा मात्र इतने तक ही सीमित नहीं है। यह आहार, विहार और व्यवहार संबंधी काफी महत्वपूर्ण विवेचन और परामर्श के साथ ही बीच-बीच में बहुत-से ऐसे नुस्खे भी बताती जाती है, जिनके सामान्य प्रयोग के द्वारा शरीर और मन के सामान्य संतुलन में आई विकृतियों का अपने स्तर पर ही उपचार किया जा सकता है और विकृति के गंभीर होने की स्थिति से बचा जा सकता है। हालाँकि शक्तिवर्द्धन और रोग से बचाव शीर्षक से एक अलग अध्याय भी पुस्तक के अंत में है, जो आयुर्वेद की बुनियादी समझ प्रदान करने के साथ-साथ एक घरेलू वैद्य की भूमिका निभाने में समर्थ है। पुस्तक पृष्ठ-दर-पृष्ठ स्वास्थ्य के प्रति अनुकरणीय जागरूकता पैदा करती है और प्रकृति के अनुरूप सहज, स्वस्थ और सात्विक जीवन का व्यावहारिक मार्ग प्रस्तुत करती है। भास्कर जुयाल द्वारा किया गया पुस्तक का हिन्दी अनुवाद सुबोध है। कहीं-कहीं प्रूफ रीडिंग की सामान्य भूलों को छोड़कर मुद्रण संबंधी दोष नहीं के बराबर हैं। आयुर्वेद और योग की विवेचना को सरल बनाने के लिए रेखाचित्रों का सहारा लिया गया है और व्यायाम तथा योगासनों की विभिन्न प्रक्रिया विधियों को तस्वीरों के माध्यम से चित्रित किया गया है।

कार्यक्षमता के लिए आयुर्वेद और योग
लेखिका : डॉ. (श्रीमती) विनोद वर्मा
अनुवाद: भास्कर जुयाल
प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली
मूल्य: 175 रुपये

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19 Responses to सेहत के लिए सिर्फ सोलह मिनट

  1. rashipal says:

    sir mere face par bahut pipils ha plz sir kuch to batao na plz

  2. ashish Dave says:

    We want to purchase the above book. Please suggest us where we can purchase.

  3. VINOD BHATT says:

    this is a very useful thing for our health

  4. yashwant says:

    I want to purchase this book please suggest

  5. THANKYOU TO TELLS THE PEOPLE ABOUT THEM, I KNOW VERY WEL THAT SOME % WILL BE ABLE TO BE ACTIVE IN HIS LIFE . EVERYBODY KNOW THAT IF HE WILL DO ANY WORK AND WHENEVER HE TIRED THEN HE WANT TO REST ,BUT HE DONT WANT TO DO ANYTHING .THAT TIME HE SHOULD DRINK THIS TEA WHICH TELLS YOU IN THIS BOOKS .
    PURCHASE KARO YA MAT KARO.

    PURCHASE KARO YA MAT KARO.

    BUT LIFE KE SATH ESA MAT KARO

    THIS LIFE IS GET IN A LONG TIME

    SO KEEP IT WITH CAREFULLY.

    EVERYBODY KNOW HOW HE CAN BE HAPPY

    THEN WHAT REQUIRE OF OTHERS

    WHY YOU THINK ABOUT OTHER

    YOU R OWN OF YOUR LIFE.

    TAKE IT , AND SAVE IT ,

    BE HAPPY ,

    THANKYOU
    JAKIR SAAB
    P.VERMA

  6. JAKIRSAAB says:

    KNOW THE POWER OF YOUR MIND AND BODY

    REMEMBER OF GOD ALWAYS ANDY POWER CAN’T TOUCH YOU.

    JAKIR SAAB HABIBPUR

  7. JAKISAAB says:

    THANKYOU TO TELLS THE PEOPLE ABOUT THEM, I KNOW VERY WEL THAT SOME % WILL BE ABLE TO BE ACTIVE IN HIS LIFE . EVERYBODY KNOW THAT IF HE WILL DO ANY WORK AND WHENEVER HE TIRED THEN HE WANT TO REST ,BUT HE DONT WANT TO DO ANYTHING .THAT TIME HE SHOULD DRINK THIS TEA WHICH TELLS YOU IN THIS BOOKS .
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    YOU R OWN OF YOUR LIFE.

    TAKE IT , AND SAVE IT ,

    BE HAPPY ,

    THANKYOU
    JAKIR SAAB
    P.VERMA

  8. jakir saab says:

    thankyou i am 100% with you , because had drink that tea ,so i can understand u , every body know that but be follow your time. not to know only you have to do if you want to be active in your life.

  9. vikas chouhan says:

    plz give me yoga stachar

  10. mukesh says:

    mujhe aap ki ye pustak chaiea kaha milege pl convwy kare pustak ka naaam kya hai indore me kaha milege
    regards
    mukesh

  11. devendra shakya says:

    mere father ke gale me khana phasta hai Doctor ne khana ki nali ka sukdna bataya hai plz koi daba btkaye

  12. yogesh rana says:

    i am suffiring from azzospermia ( means childleess deisess.)please give me some tips for these diseses.

  13. तुलसी के बारे में
    तुलसी भारत ही नही विश्व के सभी साभ्रान्त देशों में अपनी मान्यता रखती है,भारत के हर हिन्दू परिवार में यह अपना स्थान घर के आंगन में रखती है,और ग्रीस में ईस्टर्न चर्च नामक सम्प्रदाय में यह अपना स्थान बहुत अधिक रखती है,नूतन वर्ष की कामना के दिन यह चर्च में चढाई जाती है,और वहां की प्रत्येक महिला इसे सौभाग्य का कारक मानते हुए अपने घर ले जाती है,तुलसी के अन्दर प्राणघातक रोगों को हटाने की अद्भुत क्षमता है,साथ ही जहां पर भी यह विद्यमान है,वायु व्याप्त प्रदूषण को समाप्त करने में अपना अनौखा योग दान देती है,यह शारीरिक व्याधियों को दूर करने के साथ मानसिक प्रदूषण को भी सम्भालने में बहुत बडा योगदान करती है,और जो भी दिमागी बहम आदि है,वे इसके सेवन से दुरुस्त होते है,तुलसी दो प्रकार की होती है,एक रामा तुलसी,और दूसरी श्यामा तुलसी,तुलसी और काली मिर्च का काढा बनाकर पीने से आज भी भारत के ग्रामीण लोग अपने बुखार को दूर भगाते है,तुलसी की पत्तियों का सेवन दही या छाछ के साथ मिलाकर करने से वजन में कमी की जा सकती है,और शरीर में बढती हुई चर्बी को कम किया जा सकता है,शरीर में ताजगी और रक्त कणों के अन्दर बढोत्तरी करने के लिये यह एक आयुर्वेद में बेमिशाल बूटी मानी जाती है,ब्लड प्रेसर के नियमन,रक्त कणों की वृद्धि,और मानसिक रोगों में इसका महान प्रभाव देखा जाता है,अथर्ववेद में लिखा है और हमेशा से इसे अंजवाया भी गया है,कि किसी प्रकार से खाल,मांस या हड्डी के अन्दर कोई महारोग प्रविष्ट कर गया हो तो श्यामा-तुलसी उसे नष्ट कर देती है,त्वचा के लिये श्यामा तुलसी रामबाण औषधि के रूप में जानी जाती है,और इसके सेवन से किसी भी प्रकार के त्वचा रोग को समाप्त किया जा सकता है,तुलसी हिचकी,खांसी,किसी प्रकार के विषदोष,श्वास वाली बीमारी,कमर और पीठ के दर्दों में,वात वाले रोगों और मुंह की दुर्गन्ध को दूर करने में सक्षम है,तुलसी किडनी के रोगों के अन्दर अपना अद्भुत काम करती है,एक चम्मच तुलसी के रस को एक चम्मच शहद के साथ लगातार तीन महिने तक देने के बाद किडनी की पथरी भी निकल गयी थी,इन्ट्राटेप्पिकल कैंसर के रोगी को जिसके अन्दर यक्षमा का प्रवेश हो गया हो,और यकृत खराब हो गया हो,पांच सप्ताह तक केवल तुलसी का सेवन करवाया जाय तो वह ठीक हो सकता है,जिन लोगों के अन्दर हाई ब्लड प्रेसर की बीमारी है,वे नियमित तुलसी की पत्ती के रस को सुबह सुबह दो चम्मच गर्म पानी के साथ लेना चालू कर दें,खुद ही बताने लग जायेंगे कि कितनी मनोहारी है,यह तुलसी,चेहरे की चमक के लिये पचास ग्राम नीबू के रस को तांबे के बर्तन में चौबीस घंटे तक रख दीजिये,फ़िर इसमे इतनी ही मात्रा में काली तुलसी का रस और काली कसौंजी का रस मिलाइये,फ़िर धूप में रख कर इसे गाढा कर लीजिये,और एक ग्लास की सीसी में इसे पैक करने के बाद रख लीजिये,मुंहासों पर केवल दस दिन लगाइये,लगाने के एक घंटे के बाद हल्के गर्म पानी से चेहरे को साफ़ कर लीजिये,ध्यान रहे कि यह लेप मुंह के अन्दर न जा पाये,मुंहासों की कीलें ऐसे निकल जायेंगी,जो जिन्दगी भर दुबारा से परेशान नही करें,काली मिर्च,गुड,तुलसी और नीबू का काढा बनाकर मलेरिया के बुखार में दिन मे दो तीन बार पीकर किसी गर्म कपडे को ओढ कर सोने से पसीने के निकलने के साथ ही बुखार दूर हो जायेगा,शरीर के अन्दर के बुखार को भगाने के लिये तुलसी के पत्ते ढाई,काली मिर्च ढाई,और नीम की पत्ती ढाई,इन तीनो को सुबह कुल्ला करने के बाद चबाकर पानी पीने से दस बारह दिन में कैसा भी बसा हुआ बुखार हो निकल कर भाग जाता है.प्रति दिन सुबह खाली पेट तुलसी की चार पांच तुलसी की पत्तियों को पानी के साथ लेने से बल तेज और याददास्त में फ़ायदा होता है,तुलसी का पाउडर और सूखे आंवले का पाउडर शाम को भिगोकर रख दीजिये,और सुबह को उसी पानी से अपने बालों को धोइये,बालों का गिरना कम हो जायेगा,और सफ़ेद बाल काले होने लगेंगे.मर्दानगी को बढाने के लिये रामा तुलसी के बीज दो ग्राम,गाय के आधा लीटर बिना पानी मिलाये दूध और चीनी में पका कर पीने से सप्ताह के अन्दर ताकत का अनुभव होने लगता है,रामा तुलसी के हरे पत्तों का रस चावल के पानी के साथ लेने से सभी स्त्रियों के अन्दर के प्रदर वाले रोगों में फ़ायदा होता है.

  14. चाय पीने के बाद जो हल्का सा आनन्द आता है,वह चाय के अन्दर मिले ’थीन’ नामक जहर के कारण आता है,शरीर में जो ज्ञान तंतुओं के संगठन है,उनके ऊपर यह जहर काफ़ी खतरनाक प्रभाव डालता है,साथ ही टेनिन नामक पदार्थ कब्ज करने वाला और और पाचन शक्ति को बिलकुल खत्म करने वाला होता है,इसका प्रभाव शरीर पर बिलकुल शराब की तरह से पडता है,जैसे ही इसका प्रभाव चाय पीने के बाद समाप्त होने लगता है,वैसे ही गले में खुश्की और थकान पैदा होने लगती है,उसी प्रकार एक और तत्व जिसे कैफ़ीन का नाम दिया जाता है,इसका प्रभाव भी शरीर के लिये खतरनाक माना जाता है,और शरीर को अन्दर से खोखला करता चला जाता है,दिन की धडकन को घटाता है,एक दिन ऐसा आता है,कि चाय का नशा अन्दर ही अन्दर अपना काम करने के बाद शरीर को बिलकुल खत्म कर देता है,चाय पीने के बाद उपरोक्त जहरों के कारण मूत्र की मात्रा तीन गुनी बढ जाती है,और शरीर से जो जहरीले मल बाहर निकलने चाहिये.वे तो निकलते नही,यह कैफ़ीन और दूसरे जहर शरीर का पानी जो सम्पूर्ण शरीर को धोता है,उसे ही निकालता है,चाय के छोडने के लिये और शरीर में चाय से दस गुनी स्फ़ूर्ति देने के लिये एक नुस्खा है,वह इस प्रकार से है:-तुलसी की पत्ती पचास ग्राम,संतरे का छिलका पांच ग्राम,गेंहूं का चोकर पचास ग्राम,सोंठ दस ग्राम,दालचीनी की लकडी दस ग्राम,इन सब को मिलाकर पीस कर एक प्लास्टिक या वायु रहित पैकिन्ग में रख लेना चाहिये,और चाय बनाते समय चाय की पत्ती की जगह इस मिक्चर को डालना चाहिये,देखिये पहले दिन से ही कितनी स्फ़ूर्ति आती है,और कितनी जल्दी चाय नामक अमल से छुटकारा मिलता है.

  15. SHUAIB says:

    इतनी अच्छी बातें बताने के लिए आपका धन्यवाद।
    ये पुस्तक कहां से मिलेगी? वैसे इस तेज़ रफतार ज़िनदगी मे पुस्तक पढना तो दूर अखबार पढने को भी टाइम नही मिलता। मगर आपने ये जडी बोटी वाली चाये क्या है बताया नही, कम से कम वो तो पीलूं :)

  16. पुस्तक खरीदनी ही पड़ेगी अब, वैसे चाय का नुस्खा तो बता देवें तब तक।
    मेरे जैसे कई चिट्ठाकार भी इसी श्रेणी में आते हैं जो व्यर्थ की सूचनाओं और अशांत करने वाले मनोरंजन के लिए घंटों कंप्यूटर या टेलीविज़न से चिपके रहते हैं, लेकिन अपनी सेहत के लिए कुछ वक्त नियमित रूप से निकालकर योगासन और व्यायाम आदि का अभ्यास जारी रखने के मामले में आलस्य बरतते हैं।
    मेरी बातें सबको बता कर अच्छा नहीं किया आपने:)

  17. रवि says:

    पुस्तक जब तक खरीदें, आप जड़ी बूटी वाली चाय का नुस्खा तो बता ही सकते हैं ताकि थकान दूर कर सकें!

  18. खरीदनी पड़ेगी

  19. धन्यवाद सृजन जी, मेरे जैसे व्यक्ति के लिए यह किताब निहायत ज़रूरी हो गई है. इसे पढ़ने के बाद के सोलह मिनट भी. पिछले कुछ दिनों से पीठ का दर्द शुरू हो गया है. मैं परेशान हो गया था. किंतु एक्यूप्रेशर ने काम किया और बहुत राहत मिली. अब कम्प्यूटर के सामने बैठने की मुद्रा भी ठीक की है. सही बात है तंदरुस्ती पर हज़ार नैमत.

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