मेरे बारे में
February 1st, 2007 by Srijan Shilpi
लेखन मेरे लिए पेशा भी है और शौक भी। हालाँकि पेशागत लेखन की प्रकृति बदलती रही है, लेकिन पत्रकारिता के मूल तेवर स्वतंत्र लेखन में बरकरार रखने की कोशिश जारी है। लोकतंत्र के चारों स्तंभों में जो प्रत्यक्ष अनुभव हासिल हुए, उससे मोहभंग की स्थिति पैदा हुई और फिर तलाश शुरू हुई विकल्पों की। वैकल्पिक मीडिया, वैकल्पिक न्याय, वैकल्पिक चिकित्सा, वैकल्पिक शिक्षा तथा वैकल्पिक प्रशासन के प्रयोगों की तरफ दिलचस्पी बढ़ी। चिट्ठाकारी को वैकल्पिक मीडिया के एक सशक्त मंच के रूप में शौकिया तौर पर अपनाया।
अध्यात्म, योग और दर्शन को समझने में जीवन के सबसे महत्वपूर्ण एक दशक गुजारने के बाद संसार के कर्मक्षेत्र में उतरने का फैसला किया। उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और भारतीय विधि संस्थान, नई दिल्ली में हुई। पठन-पाठन में समसामयिक ज्वलंत विषयों के अलावा अंग्रेजी एवं हिन्दी साहित्य, पत्रकारिता एवं जनसंचार, संविधान एवं क़ानून, योग एवं दर्शन, समकालीन जन आंदोलन एवं बौद्धिक विमर्श के प्रति विशेष दिलचस्पी है।
हिन्दी आर्थिक पत्रकारिता पर शोधकार्य। राष्ट्रीय स्तर के पत्र-पत्रिकाओं में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर लेखन। समय-समय पर आकाशवाणी के विभिन्न केन्द्रों से वार्ताओं की प्रस्तुति। कई पुस्तकों का अनुवाद।
मातृभाषा मैथिली के साथ-साथ राजभाषा हिन्दी के प्रति गहरा अनुराग और उनको सशक्त बनाने के लिए निरंतर योगदान हेतु प्रयासरत। किसी वाद, विचारधारा अथवा राजनीति के साथ कोई संबद्धता नहीं। आम आदमी एवं हाशिए के वर्गों के हितों के लिए प्रतिबद्ध।
