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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिन पर प्रकाशित मेरे लेख पर पाठकों की व्यापक प्रतिक्रियाएँ आई थीं। आपमें से कई पाठकों ने मुझसे नेताजी से जुड़े तथ्यों के बारे में विस्तार से लिखने का आग्रह किया था। लेकिन विषय अत्यंत संवेदनशील होने के कारण मैं कुछ नए प्रमाणों के उपलब्ध होने का इंतजार कर रहा था, जिसे सूचना के अधिकार के तहत हासिल किए जाने के प्रयास चल रहे थे। हालाँकि इन प्रयासों में अभी तक कोई विशेष महत्वपूर्ण सफलता हासिल नहीं हुई है, फिर भी आशा है कि केन्द्रीय सूचना आयोग के सख्त आदेश के बाद अगले माह होने वाली सुनवाई के दौरान सरकार कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों को उजागर करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने को बाध्य होगी। 

नेताजी के कथित रूप से लापता हो जाने से संबंधित अधिकांश आधिकारिक दस्तावेजों को सरकार ने अब तक अति गोपनीय श्रेणी में रखा है। यहाँ तक कि कोलकाता उच्च न्यायालय के आदेश पर उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मनोज मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित जाँच आयोग को भी सरकार ने बारंबार अनुरोध किए जाने के बावजूद इस मामले से संबंधित कई दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए और जाँच में अपेक्षित सहयोग भी नहीं दिया। मुखर्जी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सरकार के इस रवैये के बारे में विस्तार से लिखा है। इसके बावजूद मुखर्जी आयोग ने अपने काम को बखूबी अंजाम दिया और जाँच के पाँच प्रमुख बिन्दुओं पर 8 नवम्बर, 2005 को पेश अपनी रिपोर्ट में निम्नानुसार ठोस निष्कर्ष दिए: 

(क) क्या सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु हो चुकी है या वे जीवित हैं?

मुखर्जी आयोग - नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु हो गई है।

(ख) यदि उनकी मृत्यु हो चुकी है तो क्या उनकी मृत्यु जैसा कि कहा गया है हवाई दुर्घटना में हुई थी?

मुखर्जी आयोग - उनकी मृत्यु वायुयान दुर्घटना में नहीं हुई, जैसा कि बताया जाता है।

(ग) क्या जापानी मंदिर में जो अस्थियाँ रखी हैं वे नेताजी की अस्थियाँ हैं?

मुखर्जी आयोग - जापानी मन्दिर में रखे अवशेष नेताजी के नहीं हैं।

(घ) क्या उनकी मृत्यु किसी अन्य स्थान पर किसी अन्य ढंग से हुई है और यदि हाँ तो कब और कैसे?

मुखर्जी आयोग - किसी निश्चित साक्ष्य के अभाव में कोई सकारात्मक उत्तर नहीं दिया जा सकता।

(ङ) यदि वे जीवित हैं तो उनके पते-ठिकाने के संबंध में…

मुखर्जी आयोग – उत्तर (क) में पहले ही दिया जा चुका है।

लेकिन भारत सरकार संसद में प्रस्तुत अपनी कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) में मुखर्जी आयोग के इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हुई कि नेताजी की मौत 18 अगस्त, 1945 को कथित वायुयान दुर्घटना में नहीं हुई थी और जापान के रेन्कोजी मंदिर में रखी अस्थियाँ नेताजी की नहीं हैं। संसद में इस बारे में हुए वाद-विवाद के दौरान गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने सरकार की तरफ से यह सफाई दी कि इस मामले पर पूर्ववर्ती शाह नवाज खान जाँच समिति तथा जी. डी. खोसला आयोग के निष्कर्षों को सरकार अधिक विश्वसनीय मानती है।

जबकि इसके ठीक विपरीत 28 अगस्त, 1978 को लोक सभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उन दो पूर्ववर्ती जाँचों के निष्कर्षों के संबंध में निम्न वक्तव्य दिया था:

18 अगस्त 1945 को मंचूरिया की हवाई यात्रा के दौरान तैहोकु हवाई अड्डे पर हवाई दुर्घटना में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु की रिपोर्ट के बारे में दो बार जांच की गई है जिनमें से एक मेजर जनरल शाह नवाज खां की अध्यक्षता में एक समिति द्वारा की गई थी और दूसरी पंजाब उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री जी.डी. खोसला की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जाँच समिति द्वारा की गई थी। पहली समिति ने बहुमत से और श्री खोसला ने उनकी मृत्यु संबंधी रिपोर्ट को सच माना था। उसके बाद से इन दो रिपोर्टों में पहुंचे निष्कर्षों की सच्चाई को लेकर उचित शंकाएँ प्रस्तुत की गई हैं तथा साक्षियों की गवाही में अनेक महत्वपूर्ण असंगतियाँ देखी गई हैं, कुछेक अन्य और अधिक समकालीन सरकारी दस्तावेजी रिकार्ड भी उपलब्ध हो गए हैं। इन शंकाओं और असंगतियों तथा रिकार्डों के प्रकाश में सरकार यह स्वीकार करने में दिक्कत महसूस करती है कि पिछले निर्णय असंदिग्ध थे। 

तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उपर्युक्त वक्तव्य देते समय जिन समकालीन आधिकारिक दस्तावेजी अभिलेखों का संदर्भ लिया था, उन दस्तावेजों के बारे में मुखर्जी आयोग द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और मंत्रिमंडल सचिवालय (रॉ) से बारंबार पूछे जाने पर यही जवाब मिला कि उनके पास इस तरह के कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। मुखर्जी आयोग ने सरकार के इस रवैये के बारे में निम्न शब्दों में टिप्पणी की:

2.5.7 अत: भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों/ कार्यालयों ने जो रुख अपनाया उससे यह देखा जा सकता है कि उनके पास इस तरह के कोई समकालीन सरकारी दस्तावेजी रिकार्ड उपलब्ध नहीं थे जिनके आधार पर स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई ने उपर्युक्त वक्तव्य दिया था जबकि आयोग अपने आपको यह समझाने और विश्वास करने में अत्यंत कठिनाई महसूस करता है कि देश का एक प्रधानमंत्री संसद के सदन में इस तरह का एक गलत वक्तव्य दे सकता है और उनके द्वारा उल्लिखित समकालीन सरकारी रिकार्डों के उपलब्ध न होने की स्थिति में अधिकार हनन का जोखिम आमंत्रित कर सकता है। अब जैसा कि भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों/ कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दृढ़तापूर्वक उन रिकार्डों की अनुपलब्धता की बात कही गई है – इस स्थिति ने निश्चय ही जाँच की कार्रवाई में एक रोक लगा दी है।

नेताजी की मौत की परिस्थितियों की जाँच से संबंधित अभी तक के अनुभव से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी जब तक सत्ता में रहेगी तब तक इस मामले की सच्चाई जनता के सामने नहीं आ पाएगी। कोई गैर-कांग्रेसी सरकार ही मामले की सच्चाई के उजागर होने में निमित्त बन सकती है। खोसला आयोग की रिपोर्ट के जिन निष्कर्षों को 1978 में जनता पार्टी की सरकार ने खारिज कर दिया था, उसे कांग्रेस के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार अब विश्वसनीय मान रही है। इसी तरह, वर्ष 1999 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा गठित जस्टिस मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्षों से कांग्रेस के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार ने असहमति जता दी है। 

इस संबंध में 2 फरवरी, 2007 को कोलकाता उच्च न्यायालय ने मुखर्जी आयोग के मुख्य निष्कर्षों को खारिज करने वाली केन्द्र सरकार की कार्रवाई रिपोर्ट को रद्द किए जाने की मांग करते हुए दायर एक जनहित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इस याचिका में जापान के रेन्कोजी मंदिर में रखी अस्थियों को भारत लाए जाने की अनुमति नहीं दिए जाने की प्रार्थना भी की गई है। गौरतलब है कि कोलकाता उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिए गए आदेश पर ही भारत सरकार ने मुखर्जी आयोग का गठन किया था।

सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत इस मामले से संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों की प्रतियाँ हासिल करने की कोशिशों में जुटे दिल्ली की एक गैर-सरकारी संस्था मिशन नेताजी के अनुज धर के अनुभव कुल मिलाकर बहुत उत्साहवर्धक नहीं रहे हैं। हाल ही में 19 जनवरी, 2007 को देश की बाह्य खुफिया एजेंसी रॉ ने अनुज धर को भेजे उत्तर में अपने पास नेताजी से संबंधित किसी गोपनीय दस्तावेज का अस्तित्व होने से इन्कार कर दिया है। लेकिन जैसा कि वर्ष 2001 में मुखर्जी आयोग के समक्ष तत्कालीन गृह सचिव कमल पाण्डे द्वारा दायर शपत्र पत्र के साथ संलग्न अति गोपनीय दस्तावेजों की सूची से पता चलता है कि रॉ के पास इस तरह के कुछ दस्तावेज अवश्य रहे हैं।  (क्रमश:)

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29 Responses to “नेताजी सुभाष : सत्य की अनवरत तलाश”

  1. on 08 Feb 2007 at 4:49 pm संजय बेंगाणी

    यह तय लग रहा है कि, नेताजी की मृत्यु वैसे नहीं हुई जैसे बताया जाता रहा है.
    देखना है सरकार कब तक सच्चाई को छुपा कर रख सकती है.

    अच्छी लेख श्रृंखला, अगली कड़ी का इंतजार है.

  2. नेताजी की मृत्यु से जुड़ी जानकारियों का उम्दा विश्लेषण, परंतु मृत्यु का रहस्य, रहस्य ही रहा। अगले भाग का इंतजार है, शायद कुछ रोशनी मिल सके।

    वैसे सृजन शिल्पी जी आपने बहुत ही उम्दा विश्लेषण किया है, बहुत कम लोग जानते होंगे कि किस जाँच रिपोर्ट में कौन-से तथ्य सामने आये थे? और किस पर क्या-क्या सवाल उठे थे?, आपने उनको यह जानकारी भी राष्ट्र-भाषा में उपलब्ध करवा दी है।

    अगली कड़ी जल्द ही प्रस्तुत कीजियेगा।

  3. on 08 Feb 2007 at 5:15 pm सागर चन्द नाहर

    आज तक देश यह समझ नहीं पाया कि सरकार नेताजी के देहांत के मामले में जनता को सत्य क्यों नहीं बताती।
    अगली कडियों का इंतजार बेसब्री से है।

  4. on 08 Feb 2007 at 5:19 pm अनामदास

    मेहनत सराहनीय है और सामग्री पठनीय. ब्लॉग पर तुकबंदी और मन के गुबार निकालने वाले विचार-वमन से उकताए पाठकों को ताज़गी मिलेगी. जारी रखिए.
    अनामदास

  5. on 08 Feb 2007 at 6:57 pm पंकज बेंगाणी

    सृजनजी,

    आपकी मेहनत तारीफ के लायक. कई जानकारीयाँ मिली हैं जो पता नही थी. आपको साधुवाद.

    लेकिन सोचने कि बात यह है कि आखिर ऐसा क्या है जो सरकार छुपा रही है. सोचने कि बात यह भी है कि सरकार बदलने पर भी जानकारी बाहर क्यो नहीं आती. कांग्रेस कुछ छुपाए बात समझ आती है, बीजेपी भी?

  6. on 08 Feb 2007 at 10:08 pm नीरज दीवान

    लेख पढ़कर ही महसूस हो रहा है कि नेताजी की मृत्यु का रहस्य हर आयोग के बाद और भी ज़्यादा गहरा जाता है. राजनीतिक दल राष्ट्र सपूत की शहादत पर रोटियां सेकने से बाज़ नहीं आते. आपने अत्यंत परिश्रम से तथ्यपरक लेख लिखा है. बधाई स्वीकारें.
    मैं यह भी सोच रहा हूं कि सत्तारूढ़ सरकार की कौन-सी मजबूरियां है जो मुखर्जी आयोग की मांग पर इच्छित दस्तावेज मुहैया नहीं कर सकी. किंतु यह भी सत्य है कि आयोग की सिफ़ारिशें या जांच आज्ञापक नहीं होतीं. ये सरकारों का विवेक है कि उसे स्वीकारें या अस्वीकारें. इस बिंदु पर भविष्य में किस तरह की क़ानूनी कसरत की जा सकती है.. अगले लेख में प्रकाश डालें.

  7. on 08 Feb 2007 at 10:26 pm अनूप शुक्ला

    लेख पढ़ा! आगे का इंतजार है!

  8. बहुत ही शोधपूर्ण और तथ्यपरक लेख। आशा है अगली कड़ी में और भी जानकारी मिलेगी।

  9. on 09 Feb 2007 at 7:58 am Tarun

    इतना शोधपूर्ण लेख के लिये साधुवाद, नेताजी की मृत्यु का तो वाकई अनसुलझा रहस्य है। देखें कब गुत्थी सुलझती है, सुलझती भी है कि नही।

  10. on 09 Feb 2007 at 8:41 am रवि

    सरकार इन दस्तावेज़ो को अतिगोपनीय मानकर छुपा रही है तो अवश्य ही उनमें कुछ ऐसे मसाले होंगे जिनसे राजनीतिक दलों को परेशानियाँ हो सकतीं होंगी, परंतु बीच में जनता सरकार थी और बाद में बीजेपी की तो इन्होंने तो कांग्रेस को नीचा दिखाने को कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी, तब भी तो ये जानकारियाँ बाहर आ सकती थीं?

    यह तो तय है – लोग नेता जी की मृत्यु के नाम पर नाहक हल्ला नहीं करते रहे थे.

  11. on 09 Feb 2007 at 10:37 am आलोक पुतुल

    अच्छा विश्लेषण।

  12. on 09 Feb 2007 at 10:40 am SHUAIB

    आपने अच्छा सिलसिला शुरू किया है और अगली कडीयों का भी इन्तेज़ार रहेगा। इतने बडे नेता की मृत्यु कैसे हुई जनता को पता तक नहीं?
    आपका बहुत धन्यवाद कि सिर्फ इसी लेख से बहुत सी जानकारीयां मिलीं और अगले लेख का बेचैनी से इनतेज़ार है।

  13. on 09 Feb 2007 at 1:55 pm अविनाश

    नेता जी की मृत्‍यु के संदर्भ में जितनी तरह की बातें फैली हुई हैं, वे सभी आज भ्रामक की श्रेणी में पहुंच गये हैं। अख़बारों में वक्‍त वक्‍त पर नयी बातें आती रहती हैं। अलग अलग आयोग अपनी रिपोर्ट पेश कर चुके हैं। इन सबके बीच आपका अनुसंधान (जो अभी जारी है) ज़ोखिम की हद तक नया है। आपकी इस प्रतिभा का उपयोग कई तरह के विषयों में होना चाहिए। हमारी शुभकामनाएं।

  14. on 09 Feb 2007 at 4:05 pm Jagdish Bhatia

    खोजपरक अध्ययन पर आधारित शानदार लेख। अगली कड़ियों का इंतजार रहेगा।

  15. on 09 Feb 2007 at 11:16 pm घुघूती बासूती

    धन्यवाद सृजन जी, आपने एक बार फिर अच्छा व संतुलित लेख लिखा है ।
    आपने जो गाँधी जी के विषय में वार्ता आरम्भ की थी उसपर टिप्पणी अपने स्वास्थ्य के कारण टाइप न कर सकी। पर लिखा बहुत कुछ था। ऐसे ही लिखते रहिए ।

  16. on 11 Feb 2007 at 10:52 pm Anuj Dhar

    Dear Srijanji

    Kudos to you for lucidly introducing such a complicated subject. The generations before us had been greatly confused by myriad stories and myths related to this case. Now we have much clarity, thanks to the newly available information.

    I also take this opportunity to make some small comment on what Neerajji has written:

    It is true that Govt has the right to accept or reject any report. But when the matter at hand concerns the fate of a national hero, the rejection should not be arbitrary. You will find it interesting to note that, legally speaking, the Govt continued to hold as late as February 2005 that they did not believe in the Taipei crash theory. What led to this turnaround is a mystery.

    Regards

  17. [...] नेताजी पर लेख-शृंखला के मेरे पिछले लेख पर नीरज दीवान जी ने टिप्पणी करते हुए एक जिज्ञासा व्यक्त की थी: मैं यह भी सोच रहा हूं कि सत्तारूढ़ सरकार की कौन-सी मजबूरियां है जो मुखर्जी आयोग की मांग पर इच्छित दस्तावेज मुहैया नहीं कर सकी। किंतु यह भी सत्य है कि आयोग की सिफ़ारिशें या जांच आज्ञापक नहीं होतीं. ये सरकारों का विवेक है कि उसे स्वीकारें या अस्वीकारें. इस बिंदु पर भविष्य में किस तरह की क़ानूनी कसरत की जा सकती है.. अगले लेख में प्रकाश डालें. [...]

  18. on 30 Mar 2008 at 11:05 am Saroj Sinha

    Netaji live or dead?

  19. on 07 Aug 2008 at 4:49 pm satwinder

    I am also conssious to know that Netaji live or died. If died then when, where and how. In which circumstancess and why janta janarden never know about the actuall facts of netaji’s death. why we are speechless when our childeren ask about the death of netaji.

  20. on 10 Jan 2009 at 10:00 pm Indian

    Its all politics shit. he not die as India government (Congress) shows. He disappear and India gets freedom that means its sure that some deal for freedom. and to save his reputation in blind Indians they secret all this. and memory of Indian are also not effective they forgot everything that why gandhi through him from his party he wins that time more that 200 votes. but so what Hume gulami ki adat pad chuki hai 800 saal musalmano ne phir 200 saal angrejo ne aur ab 60 saal se congress ki. Koi bata sakta hai ki angrejo ke raat me jawahar lal s/o motilal kaha se aye and how they have so much money. and what is the history of motilal nehru from where he was. all shit was a preplanned mein jyada kuch nahi kahonga kyoinki jo ye sab jante hai vo chup hai. like atal vihari bajpai. he know every thing but …..

  21. on 20 Jun 2009 at 6:02 pm sameer09673598336

    i want infermation about the monk life of netaji?
    where he get sanyasa?
    where he leaved?
    ect.
    basicaly i am writing book in marathi on netaji and ramkrushnamath and mission,and swami vivekananda.
    can any one help me.
    pls help me.

  22. on 20 Jun 2009 at 6:06 pm sameer09673598336

    if possibal pls tell me on cell phone.

  23. on 16 Jan 2010 at 11:48 pm bobby

    woh Samay jaroor ayega jab sach itihaas me darj hoga aur makkar sattadheeshon ko itihas ke kudedan me fenk diya jayega.

  24. on 29 Jan 2010 at 8:34 pm Om Verma

    Neta Ji, Aap Hindustan ke dil pe raj kartey hai or kartey rahege. Bharat ki azadi me aap
    ki bhumika ek SHER ki thai Jisne angrejo ko
    dara or hila diya tha.
    AAPKO MERA SALUTE BHARAT MATA KI JAI

  25. on 06 Apr 2010 at 1:24 pm arvind kumar

    is bare m bharat swabhiman k rastriya mantri bhai rajiv dixit se vichar kiya jave

  26. on 04 May 2010 at 2:00 am prasan

    RUTHLESS INVADERS IRRESPECTIVE FROM DIFFERENT PARTS OF THE GLOBE HAVE COME AND GONE.

    HOW STRONG OUR CULTURE IS THAT EVEN TODAY WE ARE STILL THE SAME, WHAT WE WERE YESTERDAY ! WITH VERY LITTLE OF VARIATION OF SEEING AND BELIEVING IN THINGS.

    WAKE UP MY COUNTRY MEN. WE NEED NETAJI-SUBASH BOSE IDEALOGY TO PREVAIL AND THAT CAN HAPPEN ONLY WHEN WE ALL CAN UNITE AND JOIN HANDS IRRESPECTIVE OF CASTE, CREED AND COLOR.

    WE NEED ONE INDIA-ONE CULTURE WITH MANY FAITHS TO LIVE IN.

    TO CONCLUDE WE ARE STILL IN RUTHLESS HANDS OF OUR OWN PEOPLE. POLITICS AND BUREAUCRACY.

    JAI NETAJI BOSE ! JAI HIND ! LONG LIVE THE REVOLUTION !

  27. on 19 Jun 2010 at 8:04 pm BALBEER

    YOU ARE THE BEST.WE PROUD OF YOU.BHALE HI AAP AEROPLANE ACCIDENT ME MAR GAYE HO YE AAJ TAK KISI KO PATA NAHI CHAL PAYA HE. AGAR AAP MAR BHI GAYE HO TAB BHI AAP HAMARE DILON ME HAMESA JIVIT RAHOGE.
    JAI HIND

  28. on 19 Jun 2010 at 8:08 pm BALBEER

    YOU ARE THE BEST.WE PROUD OF YOU.AAP NAI PIDHI ME FARISTA BANKAR JARUR VAPIS AAOGE.AAP HAMARE DILON ME HAMESHA RAJ KAROGE.

    JAI HIND,NETAJI SUBHASH CHANDRA BOSE KI JAI

  29. on 07 Jul 2010 at 6:14 pm Uma Shankar Rai

    Aj tak des ye samaj nahi paya ke congress Govt.& Bjp Govt. Neta ji Subash babu ke dath ke mamle me Janta ko such ku nahi batate sorry brother& sister Uncle & aunty & friends muje to is me Subash babu ke against me jo neta/leader jo un ke kam se Khus nahi ta une ke chal lagte hai ke

    JAI HIND

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