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स्टार न्यूज़ के मुम्बई कार्यालय पर आज अपराह्न लगभग चार बजे एक नवोदित अतिवादी संगठन हिन्दू राष्ट्र सेना के पचास से अधिक कार्यकर्ताओं द्वारा भारी तोड़-फोड़ की गई। स्टार न्यूज के पत्रकारों एवं कर्मचारियों की कारों के शीशे हथौड़े से तोड़ डाले गए। रिसेप्शन को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया गया और कार्यालय के अंदर घुसकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और शीशे के बने केबिन पार्टिशन आदि को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त किया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस नवोदित संगठन का प्रमुख धर्मेन्द्र देसाई नाम का एक व्यक्ति है, जिस पर चोरी और गुंडागर्दी सहित तेरह मामले पहले से पुलिस में दर्ज हैं। इस संगठन का मुम्बई प्रभारी विशाल देसाई नाम का एक युवक बताया जाता है। महाराष्ट्र के गृह मंत्री आर.आर. पाटिल ने तोड़-फोड़ की इस कार्रवाई के दो घंटे बाद घटनास्थल का दौरा किया है और पुलिस ने दावा किया है कि उसने 18 व्यक्तियों को इस सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया है। स्टार न्यूज़ के एक वरिष्ठ पत्रकार को गंभीर चोटें आने की भी ख़बर है।

बताया जाता है कि तोड़-फोड़ की यह उग्र हिंसक कार्रवाई गत शुक्रवार को स्टार न्यूज़ द्वारा सूरत से आए प्रेमी युगल क़ादिर और खुशी से संबंधित ख़बर और लाइव बातचीत को प्रसारित करने और उक्त प्रेमी युगल के जान पर खतरे की आशंका के मद्देनजर इस बारे में उन्हें पुलिस और अदालत का संरक्षण दिलाने के प्रयासों की प्रतिक्रिया के तौर पर की गई है। उक्त अतिवादी नवोदित हिन्दू संगठन ने इस तरह की हिंसक वारदात करके इस बात पर आपत्ति जताने की कोशिश की है कि एक हिन्दू लड़की, जो नाबालिग भी है, की किसी मुस्लिम युवक से शादी के मामले में मीडिया अनुचित रूप से समर्थन कर रहा है। हालांकि इस संगठन के कार्यकर्ताओं की करतूतों से ही जाहिर है कि यह कार्रवाई उन्होंने प्रचार पाने और अचानक मशहूर होने के लिए की है। वे सोचते हैं कि मीडिया का नकारात्मक प्रचार भी शायद उन्हें फायदा ही पहुंचाएगा। क्योंकि वे इससे पहले इसी तरह के हथकंडों से कुछ उग्र राजनीतिक संगठनों को सफल होते देख चुके हैं। वे समझते हैं कि जनता बेवकूफ है और उनमें से हिन्दू तो खास तौर से बेवकूफ हैं जो अपने धर्म पर मंडरा रहे खतरे से बचाने का ठेका उनके ही बहादुर कंधों पर डाल देंगे! यह एक कायरतापूर्ण और निंदनीय कार्रवाई है। हम सभी को प्रेस की स्वतंत्रता पर किए गए हिंसक हमले की भर्त्सना करनी चाहिए।

मुम्बई में आज कुछ इसी तरह का हंगामा शिव सैनिकों ने भी बॉलीवुड के एक फिल्म स्टूडियो में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान किया।

फहमीदा रियाज़ऐसे में मुझे मशहूर पाकिस्तानी शायरा फहमीदा रियाज़ की एक कविता नया भारत याद आती है, जो यहां हंस के जुलाई, 1999 अंक से साभार प्रस्तुत है:

तुम बिल्कुल हम जैसे निकले
अब तक कहां छुपे थे भाई?
वह मूरखता, वह घामड़पन
जिसमें हमने सदी गंवाई
आखिर पहुंची द्वार तुम्हारे
अरे बधाई, बहुत बधाई

भूत धरम का नाच रहा है
कायम हिन्दू राज करोगे?
सारे उल्टे काज करोगे?
अपना चमन नाराज करोगे?

तुम भी बैठे करोगे सोचा,
पूरी है वैसी तैयारी,
कौन है हिन्दू कौन नहीं है
तुम भी करोगे फतवे जारी

वहां भी मुश्किल होगा जीना
दांतो आ जाएगा पसीना
जैसे-तैसे कटा करेगी
वहां भी सबकी सांस घुटेगी

माथे पर सिंदूर की रेखा
कुछ भी नहीं पड़ोस से सीखा!
क्या हमने दुर्दशा बनायी
कुछ भी तुमको नज़र न आयी?

भाड़ में जाये शिक्षा-विक्षा,
अब जाहिलपन के गुन गाना,
आगे गड्ढा है यह मत देखो
वापस लाओ गया जमाना

हम जिन पर रोया करते थे
तुम ने भी वह बात अब की है
बहुत मलाल है हमको, लेकिन
हा हा हा हा हो हो ही ही

कल दुख से सोचा करती थी
सोच के बहुत हँसी आज आयी
तुम बिल्कुल हम जैसे निकले
हम दो कौम नहीं थे भाई

मश्क करो तुम, आ जाएगा
उल्टे पांवों चलते जाना,
दूजा ध्यान न मन में आए
बस पीछे ही नज़र जमाना

एक जाप-सा करते जाओ,
बारम्बार यह ही दोहराओ
कितना वीर महान था भारत!
कैसा आलीशान था भारत!

फिर तुम लोग पहुंच जाओगे
बस परलोक पहुंच जाओगे!

हम तो हैं पहले से वहां पर,
तुम भी समय निकालते रहना,
अब जिस नरक में जाओ, वहां से
चिट्ठी-विट्ठी डालते रहना!

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20 Responses to “तो अब ये निकले हैं हिन्दू धर्म को बचाने!”

  1. on 16 Apr 2007 at 7:06 pm अरुण

    भाई किसी न किसी को तो हिट की जरुरत रही होगी चार गुन्डे इकट्ठे होकर एक झन्डा उठा लेते है अपनी गलीच हरकतो को छुपाने के लिये और उन की हरकत पर आप लोग उन गुन्डो के नाम कर देते हो पुरे समाज कौम को और मौका दे देते है ये कुछ और आग लगाने वालो को जो पहले से ही माचिस लेकेर भूसे का ढेर ढूढते रहते है

  2. on 16 Apr 2007 at 7:13 pm अतुल शर्मा

    इससे कुछ हासिल नहीं होगा।

  3. on 16 Apr 2007 at 7:16 pm अरुण

    शायद मीडिया भी इन लोगों को ज्यादा फुटेज देने लगा है।
    वर्ना न विरोध का पता चलेगा न ज्यादा बकवास होगी, लोग दिखने के चक्कर में भी ज्यादा भड़काउ बातें करते हैं।

  4. on 16 Apr 2007 at 7:31 pm Pravin Kumar Prabhat

    इस तरह के हमलों से यह सिद्ध होता है कि कोई भी अतिवादी 40-50 लोगों(गुंडों) को जमा कर अपने आप को famous कर सकता है। ऐसी कार्रवाई मीडिया के मुख पर भी तमाचा है क्योंकि यह आम लोगों की निजी जिन्दगी में आजकल कुछ ज्यादा ही दखल दे रहा है लेकिन इसका मतलब यह कदापि नहीं कि कोई समाज का ठेकेदार बन बैठे।

  5. on 16 Apr 2007 at 8:12 pm Tarun

    is terah ki harkat karne wale gunde hi kahe jaayenge chahe woh naam kuch bhi rakh len, unko kari se kari saja to milni hi chahiye. lekin kya waqai me media ek nabalig couple ka samrthan kar reha hai us per bhi sochna chaiye. Agar ladki waqai me nabalig hai to ladke ko saja bhi milni chahiye AGAR woh shaadi kar chuke hain.

  6. on 16 Apr 2007 at 8:13 pm काकेश

    हाँ.. आजकल ये बहुत ही आसान तरीका हो गया है खुद को प्रसिद्ध करने का … इसमें कुछ हद तक मीडिया का भी दोष है .. हर छोटी से छोटी खबर को टी आर पी के चक्कर में बड़ा करके दिखाना ये शुरुआत मीडिया ने ही की ना …जब एक बिना ड्राईवर की कार पर 4 घंटे का कार्यक्रम दे सकते हैं और प्रिंस के गड्ढे में गिरने पर पूरे देश को उसमें 18 घंटे गिरा सकते हैं तो फिर किस से क्या उम्मीद करें . चौथे खंबे को जागना होगा ..और उसे जगाने में चिट्ठाजगत एक अहम भूमिका निभा सकता है… ये विचारणीय विषय है.

  7. on 16 Apr 2007 at 9:02 pm समीर लाल

    बिल्कुल गलत बात है. इस हमले की भर्त्सना करनी चाहिए।

    कविता बहुत कुछ कह रही है.

  8. on 16 Apr 2007 at 9:20 pm जीतू

    गुण्डे गुण्डे ही होते है, भले ही किसी भी पार्टी का झंडा उठा लें। इस कृत्य की कड़े से कड़े शब्दों मे निन्दा की जानी चाहिए।

    पुलिस वहाँ से ज्यादा दूर नही रही होगी, लेकिन २ घन्टे बाद पुलिस का पहुँचना कई सवाल उठाता है, वो भी मुम्बई जैसी व्यापारिक राजधानी में।
    सरकार का कर्तव्य है कि ऐसे लोगों को पकड़ कर कड़ी से कड़ी सजा दे, ताकि दोबारा ऐसी हरकत ना दोहरायी जाए।

  9. on 17 Apr 2007 at 12:08 am ghughutibasuti

    जो हुआ वह तो गलत है ही । क्या ऐसा नहीं हो सकता कि इन समाचारों को बताया दिखाया तो जाए , किन्तु कम से कम समय और महत्व देकर । कविता इतना कुछ कह गई जो हमारी हजार बहस न कह पाएँ ।
    घुघूती बासूती

  10. [...] तो क्या, आपको भी लगने लगेगा अरे ये तो किसी के लिये भी हो सकता है। उन लोगों के लिये भी जो कल ही किसी न्यूज चैनल (स्टार) के दफ्तर में तोड़ फोड़ मचा कर आये हैं, उन लोगों के लिये भी जो काश्मीर में उत्पात मचाये हुए हैं। अगर ईराक में दहशत फैलाते समूहों के लिये आप ये कह सकते हैं तो अफ्रीका में नर संहार कर रहे अति वादियों के लिये भी। इस तरह के समूह भी तो अनंत हैं, हर नयी घटना के साथ एक नये समूह के बारे मे पता चलता है। इनकी कथायें भी अनंत हैं, कभी खत्म ही नही होती। [...]

  11. on 17 Apr 2007 at 7:16 am अफ़लातून

    फ़हमीदा रियाज़ की रचना पसन्द आयी ।

  12. on 17 Apr 2007 at 10:49 am अभय तिवारी

    बात तो मुद्दे की है ही.. पर कविता कमाल की चिपकायी है आपने.. वाह!!

  13. on 17 Apr 2007 at 11:49 am सृजन शिल्पी

    @ Tarun Ji,

    lekin kya waqai me media ek nabalig couple ka samrthan kar reha hai us per bhi sochna chaiye.

    तरुण जी, नाबालिक दंपति की शादी, चाहे वह विधर्मियों के बीच ही क्यों न हो, अदालत की नज़र में अवैध नहीं है, यदि उसमें लड़की की स्वैच्छिक मर्जी शामिल है। किसी लड़की की मर्जी को मान्यता देने के लिए उसका 18 वर्ष का होना आवश्यक नहीं है। इससे संबंधित अदालत के फैसलों पर आधारित यह लेख देख सकते हैं। इसलिए उक्त प्रसंग में स्टार न्यूज़ द्वारा ऐसे दंपति की सहायता करने को गैर-क़ानूनी नहीं कहा जा सकता। यह जरूर है कि मीडिया इस तरह की स्टोरी शायद टी.आर.पी. के चक्कर में ही करता है।

  14. on 17 Apr 2007 at 6:43 pm प्रियंकर

    ये हिंदू धर्म को बचाने नहीं नसाने निकले हैं. फ़हमीदा रियाज़ की यह रचना जो कहती है उसके बाद क्या कहना बचता है. ये दस-बीस उठाईगीरे और मवाली बदमाशी करते हैं और जगहंसाई हम सबकी होती है.

  15. on 18 Apr 2007 at 10:49 am जगदीश भाटिया

    लेख पहले भी पढ़ा था पर टिप्पणी नहीं कर पाया था। अभी दोबारा पढ़ा। शानदार लेख और अच्छी कविता।

  16. on 18 Apr 2007 at 2:34 pm पंकज बेंगाणी

    bahut badiya

  17. on 18 Apr 2007 at 6:12 pm नीरज दीवान

    मैं अपने लेखन में भिड़ा था.. किंतु भैया.. ये कविता खतरनाक टाइप है. ये करारा जवाब है.

    हम जिन पर रोया करते थे
    तुम ने भी वह बात अब की है
    बहुत मलाल है हमको, लेकिन
    हा हा हा हा हो हो ही ही

    ये सार है.. बेहद सटीक – ”वे समझते हैं कि जनता बेवकूफ है और उनमें से हिन्दू तो खास तौर से बेवकूफ हैं जो अपने धर्म पर मंडरा रहे खतरे से बचाने का ठेका उनके ही बहादुर कंधों पर डाल देंगे! ”

  18. on 19 Apr 2007 at 10:05 pm कमल शर्मा

    टीवी की कमजोरी पर हमला आपने एक बेहतर और सार्थक रिपोर्ट लिखी, बशर्तें इसे हर पत्रकार और संस्‍थान पढ़ें। मुझे एक पुराना विज्ञापन याद है जिसमें कहा गया था कि चाहिए एक संपादक, वेतन दो सूखी रोटियां और ठंडा पानी। या फिर जो कहा गया था कि सफल संपादक वह है जो हर पखवाड़े शहर के चौराहे पर पिटे। लेकिन अब तो सब कुछ प्रोफेशनल हो गया है। भारतीय इलेक्‍ट्रॉनिक माध्‍यम में सब दौड़ रहे हैं कि हे भगवान मेरी टीआरपी कैसे भी बढ़ जाए। भले ही इसके लिए कभी स्‍टूडियो में लाकर किसी की हत्‍या कर उसके विजुअल भी दिखाना पड़े तो हम दिखाएंगे। चौबीस घंटे….हॉय चौबीस घंटे….ले लो न्‍यूज…जबरदस्‍ती देख लो…लेकिन टीआरपी बढ़ा दो। सृजनशिल्‍पी से मु्झे लगता है कि टीआरपी की दौड़ रही तो ये चैनल वाले स्‍टूडियो से सीधे बलात्‍कार, मारपीट, मारधाड़, चोरी व डकैती के कारनामें लाइव करने लगेंगे। इन्‍हें चाहिए कि टीवी पर एक विज्ञापन चलाते रहे कि यदि आप बलात्‍कार करने वाले हैं, या हत्‍या अथवा नंगा नाच तो प्‍लीज हमारे स्‍टूडियो में आकर करें आपको पुलिस नहीं पकड़ेगी और हम इसे समूचे राष्‍ट्र के सामने पेश करेंगे ताकि दूसरे लोग सब लाइव देख सके एंव जो हमारी टीआरपी बढ़ेगी उससे हमारा कल्‍याण होगा। आइए…आइए…बलात्‍कार व हत्‍या के लिए यहां पधारे…दूसरे चैनल पर नहीं। सिर्फ इसी चैनल पर। एनडीटीवी ने डॉयल 100 जैसा कार्यक्रम बंद कर एक मिसाल पेश की है लेकिन दूसरे चैनल आपराधिक न्‍यूज को इतना बढ़ा चढ़ाकर और नाटय रुपांतरण कर पेश करते हैं कि लगता है कि सब कुछ मीडिया ही करवा रहा है। मुझे लगता है यह बकवास बंद होनी चाहिए और इस पर बहस होनी चाहिए कि ऐसे कार्यक्रम चलते रहने चाहिए या नहीं। कही दीर्घकाल में समाज पर विपरीत असर तो नहीं डालेंगे। यदि असर डालते हैं तो इसका नुकसान मीडिया से वसूल करना चाहिए। स्‍वतंत्रता का सदुपयोग होना चाहिए न कि दिन भर अपराध। आज भारत को दुनिया में आर्थिक और राजनीतिक महासत्‍ता के रुप में स्‍थापित करना है तो हमें न्‍यूज और कार्यक्रम भी वैसे ही लाने होंगे जिनसे समाज के हर तबके का भला हो। आप बात कर रहे थे ग्रामीण पत्रकारिता की। कोई मीडिया कर्मी धूल और धूप में क्‍यों नहीं जाता, केवल इसी में लगा रहता है कि सेलिब्रिटी क्‍या कर रहे हैं। कब शादी है, शादी में क्‍या होगा, बुखार आ गया तो कैसे आ गया। कहां नंगा डांस कर रहे हैं आदि आदि। गांवों की सही सुध ली जाती है, नहीं। हिंदुस्‍तान की आत्‍मा गांवों में बसती है, और उसे नजरअंदाज किया जा रहा है। मुझे तो डर है जब सेलिब्रिटी से भी खबर नहीं मिलेंगी तो उससे ही पूछ लेंगे सर यही बात दें कि आज आपने कौनसे कलर की चड्डी पहनी है और फिर दिन भर यही लाइव चलेगा कि फलां हस्‍ती ने आज इस रंग की चड्डी पहनी है और इसके कारण्‍ा क्‍या हैं। एक ज्‍योतिष महाराज आकर बोलेंगे इस कलर की चड्डी से इन्‍हें ये ये लाभ हैं। इनका भविष्‍य यह है। टीआरपी प्रणाली को पूरी तरह बंद कर दिया जाना चाहिए, बलिक बेहतर और क्‍वॉलिटी की खबरों के आधार पर इनकी रेटिंग होनी चाहिए। ये कहते हैं कि जनता यही देखना चाहती है जो हम दिखा रहे हैं, जनता तो नंग धड़ग एंकर देखना चाहते हैं, कर देना सबको नंगा। बैठा देना कुर्सी के बजाय टेबल पर, सब दिखेगा और टीआरपी बढ़ेगी। प्रेस की आजादी के नाम पर जो बेकार का हल्‍ला मचाया गया वह प्रेस की आजादी पर हमला नहीं था। ढोंग कर रहे हैं, ऐसे लोग जो इसे हमला बता रहे हैं। कभी कभी तो लगता है ये लोग न्‍यूज पढ़ रहे हैं या चीख चीख कर हल्‍ला मचा रहे हैं। हथौड़ा मार रहे हैं दर्शकों के सिर पर। धीरे और शालीन तरीके से पढ़ो न खबरें। ये लोग जो हथौंडा मार ब्रांड खबरें सुना रहे हैं वह आम जनता पर हमला है।

  19. on 19 Dec 2007 at 9:16 pm anil

    Mere Hisab Sey star key officer per hamla thik hey. Kyoki hindu dharm per hamla bardast key bahar hey hum bhi pyar mey dharm ko nahi mante hai. lekin aisa hi kyo hota hai ki hamesha ladka muslim aur ladki hindu hoti hai kyo media ney kabhi kisi hindu ladke aur muslim ladki ko tul nahi diya.

  20. on 22 Mar 2008 at 7:57 am Nagendra Nath Mishra

    AHINSA PRMO DHARMA
    Media Always Try to Heart The Hinduism Emotion.They Cover The Sensitive Issues & Neglect The Real News Like Kashmiri Pundits & Their Trouble Only Because They All Are Hindus.
    In Whole India Christian Schools & Church Are Always Convert The Poor Hindu By Money And Muscle Power, To Christian And Media Close Their Eyes , Because They Also Evolve Badly In This Work.
    Above Type Of Mishappening Is Possible In Any Where In The World , If Position Is Opposite And Muslim Girls Along With Hindu Boys The Muslim People Are Doing More Than This And Also Fatwa Declared By Them.
    So, Try To Understood Do Not Disturb The Religious Felling
    If Any One Make A Bad Shape Image Of Hindu’s God’s.
    Media At Once Capture & Broadcast As A Masala News In Whole World.
    But They Never Comment The Bad Shape Of Other Religions Like Muslims And Christians.

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