धर्म, राजनीति और हम
Posted in चिट्ठाकारिता, दर्शन, राजनीति, समसामयिक on March 7th, 2008 8 Comments »
जड़ प्रकृति के पिंडों के बीच जिस प्रकार आकर्षण और प्रतिकर्षण के दो बल सर्वदा एक साथ क्रियाशील रहते हैं जिनके कारण उनके बीच एक संतुलन बना रहता है, ठीक वैसे ही आकर्षण और प्रतिकर्षण के दो बल चेतन प्रकृति के जीवों के बीच भी सदा क्रियाशील रहते हैं जो सृष्टि चक्र में संतुलन बनाए [...]
