Posted in दर्शन, निजी डायरी, पर्व-उत्सव on October 21st, 2007 7 Comments »
मैं किसी ‘मुर्दा शांति’ की बात नहीं कर रहा, जो बकौल पाश ‘सबसे खतरनाक’ होती है। मैं उस जीवंत शांति की बात कर रहा हूँ, जिसमें हम इंसानों की कोई दिलचस्पी नहीं है। ऐसी शांत-सहज-सरल जिंदगी, जिसमें कोई बड़ी हलचल न हो, उथल-पुथल न हो, तनाव भरा संघर्ष न हो, दाँव-पेंच न हो, हार-जीत न [...]
यमलोक
रोजगार समाचार
भूलोक के महान पुरातन राष्ट्र और धरती की भावी आर्थिक महाशक्ति भारतवर्ष की गौरवशाली राजधानी दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में प्रमुखता से शामिल ब्लू लाइन बसों की चपेट में आकर असमय अपना देह त्याग करने वाली जीवात्माओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए तदर्थ आधार पर यमलोक में ‘यमदूत’ के कुछ अतिरिक्त [...]
Posted in दर्शन, निजी डायरी on October 2nd, 2007 6 Comments »
बचपन में जब तक स्वभाव में मासूमियत बची हुई थी, बापू कभी-कभार मेरे सपने में आया करते थे। जब भी वह सपने में आए, रोते ही मिले। बचपन में मेरे दिल में अंकित उनकी वही छवि आज भी बसी है, कि बापू दु:खी हैं, उनकी आत्मा कराह रही है। दसवीं के बोर्ड का [...]