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Archive for September, 2007

आनंद कई दिनों से पूछना चाह रहे थे। बुद्ध के साथ वह निरंतर यात्रा पर थे और रात्रि विश्राम के समय उनके बगल में ही सोया करते थे। सुबह बुद्ध की आंखें खुलीं तो आनंद के मुख पर उत्सुकता और हैरानी के भाव देखकर मुस्करा उठे। आखिरकार आनंद ने पूछ ही लिया, “भगवन, मैं सोते [...]

भारत एक भीड़ है और मैं उस भीड़ में शामिल धक्के खाता हाशिए पर खड़ा एक नागरिक हूँ। सड़क, रेल, हवाई अड्डा, अस्पताल, स्कूल, कचहरी, थाना, जेल, मंदिर, राशन दुकान, सिनेमा घर, नगरपालिका, ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, टेलीफोन एक्सचेंज, बिजली ऑफिस, बाजार, श्मशान — हर जगह भीड़ ही भीड़ है और मैं बेबस, निरीह, कतारबद्ध, धैर्य के [...]