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Archive for July, 2007

राजभाषा हिन्दी भारत में घर की मुर्गी की तरह है जो दाल बराबर समझी जाती रही है, लेकिन न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच से इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित कराने की बहुत धूमधाम से कवायद चल रही है। विडंबना की बात यह है कि हिन्दी के दिग्गज विद्वान इस समय चल रहे विश्व [...]

तेरी सूरत मिलती नहीं किसी सूरत से
हम जमाने में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं।
हर व्यक्ति के मन में ऐसी कोई-न-कोई तस्वीर जरूर होती है, जरूरी नहीं कि वह व्यक्ति कलाकार भी हो। यदि वह व्यक्ति कलाकार हो तो वह उसे शब्दों, रंगों या पत्थरों के माध्यम से मूर्त रूप प्रदान कर सकता है, और यदि [...]