Posted in विश्लेषण, समसामयिक on May 12th, 2007 27 Comments »
उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद और मतों की गिनती शुरू होने से कुछ घंटे पहले मैंने मित्र नीरज दीवान जी से पूछा कि उनका अंतिम आकलन क्या है, यू.पी. में ऊँट किस करवट बैठेगा? उनका जवाब था — राज्यपाल के विवेकाधिकार की अहम भूमिका होगी और बसपा [...]
Posted in कविता, साहित्य on May 3rd, 2007 7 Comments »
मार्च में जब मैंने अपनी कविता मुझे विदुर चाहिए पोस्ट की थी तब मुझे कतई अंदाज़ा नहीं रहा था कि उस पर इतनी व्यापक और तीव्र प्रतिक्रिया होगी। उक्त कविता में भीष्म पर किए गए प्रहारों ने कई संवेदनशील पाठकों को विचलित किया और उसके परिणामस्वरूप मेरे और पाठकों के बीच टिप्पणियों-प्रतिटिप्पणियों का एक लंबा दौर भी चला। [...]
आप सभी को बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
अमेरिकी सरकार की कैद के दौरान दिए गए धीमे जहर के घातक असर के कारण दिसम्बर, 1988 में ओशो कुछ सप्ताह तक गंभीर रूप से बीमार रहे और मरणासन्न हो चले थे। स्वस्थ होने पर उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान कुछ समय तक वह गौतम बुद्ध की चेतना के वाहक बन गए थे। [...]