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	<title>Comments on: हिन्दी चिट्ठाकारिता के नवीन आयाम</title>
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	<description>बेहतर दुनिया के लिए बेहतर इंसान चाहिए</description>
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		<title>By: पत्रिका &#124; इंटरनेट, चिट्ठाकारी, पत्रकारिता और क़ानून</title>
		<link>http://srijanshilpi.com/?p=39#comment-2705</link>
		<dc:creator>पत्रिका &#124; इंटरनेट, चिट्ठाकारी, पत्रकारिता और क़ानून</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Sep 2007 18:20:47 +0000</pubDate>
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		<description>[...] चिट्ठा जगत में पत्रकारिता बनाम चिट्ठाकारिता पर बहस अक्सर चलती ही रहती है। देबाशीष जी द्वारा एक बार चिट्ठा चर्चा  पर इस बहस के पटाक्षेप की घोषणा कर दिए जाने के बाद भी वह जारी है। डॉ. बेजी ने इस बहस को लेकर पिछली बार कुछ ऐसा राग छेड़ा कि अपनी तरफ से निष्कर्ष निकाल देने के बाद भी उसके सुर मंद नहीं पड़ सके। हालांकि हिन्दी चिट्ठा जगत में कई पत्रकार पहले से ही सक्रिय रहे हैं और इस विषय पर चर्चा पहले भी होती रही है, लेकिन इस तरह की श्रृंखलाबद्ध बहस इस विषय पर पहली बार हुई। इस बहस के दौरान पत्रकार और चिट्ठाकार, दोनों के नजरिए से बहुत-सी महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। अनूप जी, प्रमोद जी, अभय जी, अनामदास जी और काकेश जी जैसे कई साथियों ने इस विषय पर बहुत अच्छा लिखा। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] चिट्ठा जगत में पत्रकारिता बनाम चिट्ठाकारिता पर बहस अक्सर चलती ही रहती है। देबाशीष जी द्वारा एक बार चिट्ठा चर्चा  पर इस बहस के पटाक्षेप की घोषणा कर दिए जाने के बाद भी वह जारी है। डॉ. बेजी ने इस बहस को लेकर पिछली बार कुछ ऐसा राग छेड़ा कि अपनी तरफ से निष्कर्ष निकाल देने के बाद भी उसके सुर मंद नहीं पड़ सके। हालांकि हिन्दी चिट्ठा जगत में कई पत्रकार पहले से ही सक्रिय रहे हैं और इस विषय पर चर्चा पहले भी होती रही है, लेकिन इस तरह की श्रृंखलाबद्ध बहस इस विषय पर पहली बार हुई। इस बहस के दौरान पत्रकार और चिट्ठाकार, दोनों के नजरिए से बहुत-सी महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। अनूप जी, प्रमोद जी, अभय जी, अनामदास जी और काकेश जी जैसे कई साथियों ने इस विषय पर बहुत अच्छा लिखा। [...]</p>
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	<item>
		<title>By: pulanet &#187; Blog Archive &#187; Professional Blogging in Indian Language Hindi</title>
		<link>http://srijanshilpi.com/?p=39#comment-1367</link>
		<dc:creator>pulanet &#187; Blog Archive &#187; Professional Blogging in Indian Language Hindi</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 May 2007 19:27:29 +0000</pubDate>
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		<description>[...] Recently, there has been lot of buzz (Shrish, Srijan, Tarun, DhurVirodhi, Masijeevi, Ravi, Jitu, Amit Gupta) about Professional Blogging in the Hindi Blogosphere. [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] Recently, there has been lot of buzz (Shrish, Srijan, Tarun, DhurVirodhi, Masijeevi, Ravi, Jitu, Amit Gupta) about Professional Blogging in the Hindi Blogosphere. [...]</p>
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	<item>
		<title>By: Srijan Shilpi &#187; Blog Archive &#187; मेरे जवाब भी हाजिर हैं</title>
		<link>http://srijanshilpi.com/?p=39#comment-476</link>
		<dc:creator>Srijan Shilpi &#187; Blog Archive &#187; मेरे जवाब भी हाजिर हैं</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Feb 2007 21:37:28 +0000</pubDate>
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		<description>[...] रवि रतलामी जी का ब्लॉग के बारे में अभिव्यक्ति पर प्रकाशित इस लेख को शायद मैंने सबसे पहले कंप्यूटर पर सुरक्षित किया था। अपने लेख हिन्दी चिट्ठाकारिता के नवीन आयाम में रवि जी के उक्त लेख के अलावा जीतू भाई के लेख हिन्दी ब्लॉगिंग का व्यावसायिक भविष्य को पहली बार हाइपरलिंक्स से जोड़ा था। किसी अन्य उद्देश्य से किसी चिट्ठे की किसी प्रविष्टि को कंप्यूटर पर कापी करने की जरूरत उससे पहले मुझे महसूस नहीं हुई। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] रवि रतलामी जी का ब्लॉग के बारे में अभिव्यक्ति पर प्रकाशित इस लेख को शायद मैंने सबसे पहले कंप्यूटर पर सुरक्षित किया था। अपने लेख हिन्दी चिट्ठाकारिता के नवीन आयाम में रवि जी के उक्त लेख के अलावा जीतू भाई के लेख हिन्दी ब्लॉगिंग का व्यावसायिक भविष्य को पहली बार हाइपरलिंक्स से जोड़ा था। किसी अन्य उद्देश्य से किसी चिट्ठे की किसी प्रविष्टि को कंप्यूटर पर कापी करने की जरूरत उससे पहले मुझे महसूस नहीं हुई। [...]</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: निठल्ला चिन्तन &#187; व्यावसायिक चिट्ठाकारी पर टिप्पणी</title>
		<link>http://srijanshilpi.com/?p=39#comment-457</link>
		<dc:creator>निठल्ला चिन्तन &#187; व्यावसायिक चिट्ठाकारी पर टिप्पणी</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Feb 2007 18:29:39 +0000</pubDate>
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		<description>[...] हिन्दी चिट्ठाकारिता के नवीन आयाम [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] हिन्दी चिट्ठाकारिता के नवीन आयाम [...]</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: सृजन शिल्पी &#187; Blog Archive &#187; हिंदी चिट्ठाकारिता के नए दौर का आग़ाज़</title>
		<link>http://srijanshilpi.com/?p=39#comment-112</link>
		<dc:creator>सृजन शिल्पी &#187; Blog Archive &#187; हिंदी चिट्ठाकारिता के नए दौर का आग़ाज़</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Aug 2006 12:13:46 +0000</pubDate>
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		<description>[...] टिप्पणियाँ Bhushan on हिंदी चिट्ठाकारिता के नए दौर का आग़ाज़छींटे और बौछारें &#187; आ अब लौट चलें&#8230; onके नवीन आयामपंकज बेंगाणी on हिंदी चिट्ठाकारिता के नए दौर का आग़ाज़जीतू on हिंदी चिट्ठाकारिता के नए दौर काआग़ाज़नीरज दीवान on हिंदी चिट्ठाकारिता के नए दौर का आग़ाज़ [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] टिप्पणियाँ Bhushan on हिंदी चिट्ठाकारिता के नए दौर का आग़ाज़छींटे और बौछारें &raquo; आ अब लौट चलें&#8230; onके नवीन आयामपंकज बेंगाणी on हिंदी चिट्ठाकारिता के नए दौर का आग़ाज़जीतू on हिंदी चिट्ठाकारिता के नए दौर काआग़ाज़नीरज दीवान on हिंदी चिट्ठाकारिता के नए दौर का आग़ाज़ [...]</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: छींटे और बौछारें &#187; आ अब लौट चलें&#8230;</title>
		<link>http://srijanshilpi.com/?p=39#comment-111</link>
		<dc:creator>छींटे और बौछारें &#187; आ अब लौट चलें&#8230;</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Aug 2006 11:20:16 +0000</pubDate>
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		<description>[...] इस परिवर्तन की नींव  शायद पहले ही पड़ चुकी थी - या शायद नियति ही थी. संबल मिला सृजनशिल्पी  व रमण  के लेख व टिप्पणियों से. [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] इस परिवर्तन की नींव  शायद पहले ही पड़ चुकी थी &#8211; या शायद नियति ही थी. संबल मिला सृजनशिल्पी  व रमण  के लेख व टिप्पणियों से. [...]</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: सृजन शिल्पी</title>
		<link>http://srijanshilpi.com/?p=39#comment-110</link>
		<dc:creator>सृजन शिल्पी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Aug 2006 17:16:38 +0000</pubDate>
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		<description>अनुनाद जी, जिन उप-उद्देश्यों को आपने सूत्रबद्ध किया है, उनको चिट्ठाकारी के प्रयोजन के साथ कैसे जोड़ा जाए, यही असली मुद्दा है। हम अपनी रोजी-रोटी कमाते हुए, रोजमर्रा की जिंदगी के संघर्षों से जूझते हुए, चिट्ठाकारी के शौक, आदत या व्यवसाय के साथ भारत-2020 के लक्ष्य और उसको हासिल करने के लिए तमाम उप-लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में कैसे आगे बढ़ें, यही हमारे विचार का मुद्दा है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अनुनाद जी, जिन उप-उद्देश्यों को आपने सूत्रबद्ध किया है, उनको चिट्ठाकारी के प्रयोजन के साथ कैसे जोड़ा जाए, यही असली मुद्दा है। हम अपनी रोजी-रोटी कमाते हुए, रोजमर्रा की जिंदगी के संघर्षों से जूझते हुए, चिट्ठाकारी के शौक, आदत या व्यवसाय के साथ भारत-2020 के लक्ष्य और उसको हासिल करने के लिए तमाम उप-लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में कैसे आगे बढ़ें, यही हमारे विचार का मुद्दा है।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: anunad</title>
		<link>http://srijanshilpi.com/?p=39#comment-109</link>
		<dc:creator>anunad</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Aug 2006 16:05:12 +0000</pubDate>
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		<description>भारत को २०२० तक विकसित देखने में बहुत से उप-उद्देश्य पूरे करने होंगे:
१) हिन्दी को भारत के भीतर और बाहर उसका सम्मानित स्थान दिलाना,
२) देश को हरियाली से भर देना
३) देश से भ्रष्टाचार का निर्मूलन
४) देश को सुरक्षित और सशक्त बनाना
५) देश में कार्य की संस्कृति को आत्मसात करना और श्रम का सम्मान्
६) देश में आत्मविश्वास का महौल पैदा करना
७) देश के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानो में नयी सोच और उन्नत सोच का समावेश्
८) वैकल्पिक उर्जा/सस्टेनेबुल उर्जा को साकार करना आदि</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भारत को २०२० तक विकसित देखने में बहुत से उप-उद्देश्य पूरे करने होंगे:<br />
१) हिन्दी को भारत के भीतर और बाहर उसका सम्मानित स्थान दिलाना,<br />
२) देश को हरियाली से भर देना<br />
३) देश से भ्रष्टाचार का निर्मूलन<br />
४) देश को सुरक्षित और सशक्त बनाना<br />
५) देश में कार्य की संस्कृति को आत्मसात करना और श्रम का सम्मान्<br />
६) देश में आत्मविश्वास का महौल पैदा करना<br />
७) देश के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानो में नयी सोच और उन्नत सोच का समावेश्<br />
८) वैकल्पिक उर्जा/सस्टेनेबुल उर्जा को साकार करना आदि</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: रवि</title>
		<link>http://srijanshilpi.com/?p=39#comment-108</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Aug 2006 03:39:46 +0000</pubDate>
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		<description>...रवि रतलामी के नाम से हिन्दी ब्लॉग जगत में मशहूर हैं, संभवतया हिन्दी के पहले पूर्णकालिक चिट्ठाकार हैं। उन्होंने हिन्दी चिट्ठाकारिता की व्यावसायिक संभावनाओं को टटोलने और दोहन करने की शुरुआत की है।...


पूर्णकालिक चिट्ठाकार ? धन्यवाद, और संभवतः. हाँ, मैंने हिन्दी चिट्ठाकारिता की व्यावसायिक संभावनाओं को दोहन करने की शुरुआत भी कर दी है. परंतु अभी तो यह ऊँट के मुँह में जीरा के समान है. महीने भर में आंकड़ा दहाई से पार ($) नहीं जा रहा. उम्मीद करते हैं कि तीन-चार साल में ही आंकड़ा सैकड़ा तक तो पहुँच ही जाएगा :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>&#8230;रवि रतलामी के नाम से हिन्दी ब्लॉग जगत में मशहूर हैं, संभवतया हिन्दी के पहले पूर्णकालिक चिट्ठाकार हैं। उन्होंने हिन्दी चिट्ठाकारिता की व्यावसायिक संभावनाओं को टटोलने और दोहन करने की शुरुआत की है।&#8230;</p>
<p>पूर्णकालिक चिट्ठाकार ? धन्यवाद, और संभवतः. हाँ, मैंने हिन्दी चिट्ठाकारिता की व्यावसायिक संभावनाओं को दोहन करने की शुरुआत भी कर दी है. परंतु अभी तो यह ऊँट के मुँह में जीरा के समान है. महीने भर में आंकड़ा दहाई से पार ($) नहीं जा रहा. उम्मीद करते हैं कि तीन-चार साल में ही आंकड़ा सैकड़ा तक तो पहुँच ही जाएगा <img src='http://srijanshilpi.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: मनीष</title>
		<link>http://srijanshilpi.com/?p=39#comment-107</link>
		<dc:creator>मनीष</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Aug 2006 14:12:16 +0000</pubDate>
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		<description>अभी भी ज्यादातर चिट्ठाकार आत्मसुख के लिये मनमर्जी विषयों पर लिख रहे हैं। अगर सामूहिक रूप से एक निश्चित उद्देश्य के लिये लिखने लगे तो वो विधा समाज के लिये उपयोगी तो जरूर होगी पर चिट्ठाकारिता के स्वाभाविक चरित्र से अलग होगी ।
आपका ये रोचक लेख इस विषय के संपूर्ण बिन्दुओं को छूता हुआ गुजरता है ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अभी भी ज्यादातर चिट्ठाकार आत्मसुख के लिये मनमर्जी विषयों पर लिख रहे हैं। अगर सामूहिक रूप से एक निश्चित उद्देश्य के लिये लिखने लगे तो वो विधा समाज के लिये उपयोगी तो जरूर होगी पर चिट्ठाकारिता के स्वाभाविक चरित्र से अलग होगी ।<br />
आपका ये रोचक लेख इस विषय के संपूर्ण बिन्दुओं को छूता हुआ गुजरता है ।</p>
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