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Archive for the 'संविधान और विधि' Category

‘यूथ फॉर मेनटेनिंग अन-इक्वलिटी’ के उत्साही युवक आरक्षण-विरोध के प्रायोजित अभियान में सुप्रीम कोर्ट का जिस तरह से इस्तेमाल करना चाह रहे थे, वैसा तो हरगिज मुमकिन नहीं था। आरक्षण के मुद्दे पर फैसला करते समय सुप्रीम कोर्ट को न सिर्फ अपनी साख और मर्यादा का ख्याल रखना था, बल्कि लोकतंत्र के दूसरे संवैधानिक स्तंभों [...]

तटस्थ मतदाताओं का अपराध
आप तो जानते ही हैं कि जो निर्णायक मौकों पर तटस्थ रहते हैं, समय उनके भी अपराध लिखता है। क्या आप भी उन चालीस फीसदी तटस्थ मतदाताओं में शामिल हैं जो चुनाव के दौरान अपना वोट डालने मतदान केन्द्रों पर नहीं जाते? यदि हाँ तो आप भी समय की डायरी में दर्ज [...]

इस लेख-श्रृंखला के पिछले लेख में हम चर्चा कर रहे थे कि रफ़्तार के मामले में क़ानून हमेशा टेक्नोलॉजी से पीछे रहता है। लेकिन ज़ुर्म करने वाले क़ानून की कछुआ चाल में यक़ीन नहीं करते। वे टेक्नोलॉजी के मामले में हमेशा क़ानून और उसका पालन करवाने वाले कारिंदों से आगे रहते आए हैं। वर्ष 2005 [...]

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