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Archive for the 'पत्रकारिता' Category

यह महज संयोग से कुछ अधिक लगता है। इस चिट्ठे पर तीसरे मोर्चे से संबंधित पिछले लेख में कांग्रेस और भाजपा के बीच पनप रहे नापाक किस्म के दोस्ताने को खास तौर पर रेखांकित किया गया था। और, कांग्रेस का मीडिया प्रकोष्ठ इस तरह के दोस्ताने के सार्वजनिक होने के घातक असर को प्रभावशून्य करने [...]

बुद्धिजीवियों की उस मुर्दा और पाखंडी जमात में शामिल होने का अपना मन नहीं रहा है जो अपनी हसरतों और ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए ज़मीर को ताक पर रखकर चापलूसी और गुटबाजी के सारे दाँव-पेंच आजमाते हुए लाला और बाजार की नौकरी बजाने के बाद कोई अनुकूल मंच पाते ही अपनी सारी भड़ास [...]

भारत एक भीड़ है और मैं उस भीड़ में शामिल धक्के खाता हाशिए पर खड़ा एक नागरिक हूँ। सड़क, रेल, हवाई अड्डा, अस्पताल, स्कूल, कचहरी, थाना, जेल, मंदिर, राशन दुकान, सिनेमा घर, नगरपालिका, ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, टेलीफोन एक्सचेंज, बिजली ऑफिस, बाजार, श्मशान — हर जगह भीड़ ही भीड़ है और मैं बेबस, निरीह, कतारबद्ध, धैर्य के [...]

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