Posted in पत्रकारिता, राजनीति, समसामयिक on January 25th, 2008 4 Comments »
यह महज संयोग से कुछ अधिक लगता है। इस चिट्ठे पर तीसरे मोर्चे से संबंधित पिछले लेख में कांग्रेस और भाजपा के बीच पनप रहे नापाक किस्म के दोस्ताने को खास तौर पर रेखांकित किया गया था। और, कांग्रेस का मीडिया प्रकोष्ठ इस तरह के दोस्ताने के सार्वजनिक होने के घातक असर को प्रभावशून्य करने [...]
यह साबित करने के लिए अलग से दलील, तथ्य और प्रमाण पेश करने की जरूरत नहीं रह गई है कि केन्द्र की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे के अस्तित्व को बनाए रखने में सबसे बड़े मददगार बनते जा रहे हैं। यदि इन दोनों पार्टियों का वश चले तो वे तमाम अन्य दलों को राजनीति [...]
Posted in जन सरोकार, व्यंग्य, समसामयिक on November 24th, 2007 7 Comments »
हमारे लोकतंत्र के सबसे शक्तिशाली शाही ख़ानदान के शहजादों और शहजादियों के बीच एक ख़ास फ़र्क पर आपने भी गौर किया होगा। शहजादों को मोहब्बत होती है गोरी, विलायती मेमों से और शहजादियों को मोहब्बत होती है आम हिन्दुस्तानी मर्दों से। शहजादे विलायती गोरियों के इशारे पर नाचते हैं और शहजादियाँ हिन्दुस्तानी मर्दों को इशारे [...]