जड़ प्रकृति के पिंडों के बीच जिस प्रकार आकर्षण और प्रतिकर्षण के दो बल सर्वदा एक साथ क्रियाशील रहते हैं जिनके कारण उनके बीच एक संतुलन बना रहता है, ठीक वैसे ही आकर्षण और प्रतिकर्षण के दो बल चेतन प्रकृति के जीवों के बीच भी सदा क्रियाशील रहते हैं जो सृष्टि चक्र में संतुलन बनाए [...]
चार बजट नोट कमाने के लिए और एक बजट वोट पाने के लिए। पांच साल की सत्ता के दौरान चार साल बाजार के साथ ताल में ताल मिलाने के बाद पांचवें साल वोटर की तरफ मुखातिब होना लोकतंत्र में सरकार की मजबूरी है। चुनाव में उतरकर जनता से समर्थन मांगने की यह मजबूरी यदि सरकार [...]
Posted in पत्रकारिता, राजनीति, समसामयिक on January 25th, 2008 4 Comments »
यह महज संयोग से कुछ अधिक लगता है। इस चिट्ठे पर तीसरे मोर्चे से संबंधित पिछले लेख में कांग्रेस और भाजपा के बीच पनप रहे नापाक किस्म के दोस्ताने को खास तौर पर रेखांकित किया गया था। और, कांग्रेस का मीडिया प्रकोष्ठ इस तरह के दोस्ताने के सार्वजनिक होने के घातक असर को प्रभावशून्य करने [...]