Posted in दर्शन, निजी डायरी on June 22nd, 2008 12 Comments »
अपने एक मित्र से मिलने गया था। उनके कार्यालय की दीवार पर टँगे एक वाक्य पर नज़र गई। लिखा था, “सपने वे नहीं होते जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वे होते हैं जो हमें सोने नहीं देते।” उस वाक्य में निहित प्रेरणा देर तक मन में गूंजती रही। किंतु फिलहाल, मैं उन्हीं सपनों [...]
जड़ प्रकृति के पिंडों के बीच जिस प्रकार आकर्षण और प्रतिकर्षण के दो बल सर्वदा एक साथ क्रियाशील रहते हैं जिनके कारण उनके बीच एक संतुलन बना रहता है, ठीक वैसे ही आकर्षण और प्रतिकर्षण के दो बल चेतन प्रकृति के जीवों के बीच भी सदा क्रियाशील रहते हैं जो सृष्टि चक्र में संतुलन बनाए [...]
एक हिन्दुस्तानी की डायरी पर दो सप्ताह पहले अतिथि चिट्ठाकार के रूप में शुरुआत करते हुए Design Flute ने “राम बोलने से क्या बन जाएगा” शीर्षक से धर्म और आस्था के सवाल पर एक बहस छेड़ी थी और साथ ही एक अनुरोध भी किया था:
आप सबसे निवेदन है कि आपके हिसाब से धर्म क्या है, [...]