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Archive for the 'समीक्षा' Category

जिंदगी की राह में मिले अच्छे-बुरे अनुभवों के खट्टे-मीठे रंगों के कोलाज हम सब के मन में बनते-मिटते रहते हैं, लेकिन जब हम किसी कहानी के पात्रों के प्रिज्म से होकर उन्हें देखते हैं तो उन कोलाजों में से उभरती कुछ नायाब शक्लें स्मृति-पटल पर टँग जाती हैं। अच्छी कहानियों को पढ़ते हुए जिंदगी के [...]

गत दिसम्बर माह में मुझे ‘कवियों के कवि’ शमशेर बहादुर सिंह की कविताओं और उनपर लिखे गए आलोचनात्मक निबंधों का अवगाहन करने का अवसर मिला था और उसी क्रम में मैंने खुद भी उन पर एक आलोचनात्मक निबंध  लिखा था। अपने चिट्ठाकार मित्र जयप्रकाश मानस जी के अनुरोध पर मैंने उसे ‘सृजन-गाथा’ में प्रकाशनार्थ भेज दिया था, जिसे उन्होंने अब पत्रिका के फरवरी, 2007 अंक में सहर्ष शामिल [...]

बाबा नागार्जुन हमारे शहर दरभंगा की धड़कन हुआ करते थे। अंतिम समय तक वह अपनी जड़ों से जुड़े रहे। हमारी मातृभाषा मैथिली में विद्यापति के बाद वह सबसे बड़े कवि हुए। मैथिली में वह ‘यात्री’ नाम से लिखा करते थे। बच्चों, युवाओं और वृद्धों में वह समान रूप से लोकप्रिय थे। मुझे उनकी कविताओं से बचपन से [...]

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