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Archive for the 'भाषा चिंतन' Category

यह देखकर अच्छा लग रहा है कि हिन्दी साहित्य के शोधछात्र भी अब शोध के
सिलसिले में इंटरनेट का रुख़ करने लगे हैं और गूगल सर्च एवं हिन्दी विकिपीडिया के लेखों में दिए गए संदर्भ लिंकों के माध्यम से हिन्दी चिट्ठों पर उपलब्ध सामग्रियों में से भी अपने उपयोग लायक सामग्री तलाश रहे हैं। इस तरह [...]

इंटरनेट : मानवता का व्यक्त मानस पटल
इंटरनेट, समकालीन अग्रगामी मानवता का समष्टिगत, व्यक्त मानस पटल है। मानव अभिव्यक्ति का यह एक ऐसा विराट, अनंत और जीवंत सागर है जिसमें विचारों, भावनाओं और सूचनाओं की निरंतर चतुर्दिक तरंगें और लहरें उठती रहती हैं। प्रकृति ने मनुष्य को अभिव्यक्ति की जो बेचैनी और क्षमता नैसर्गिक रूप से [...]

राजभाषा हिन्दी भारत में घर की मुर्गी की तरह है जो दाल बराबर समझी जाती रही है, लेकिन न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच से इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित कराने की बहुत धूमधाम से कवायद चल रही है। विडंबना की बात यह है कि हिन्दी के दिग्गज विद्वान इस समय चल रहे विश्व [...]

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